Shri Krishna Chalisa

Shri Krishna Chalisa
Shri Krishna Chalisa

श्री कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa)

भगवान श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। वे प्रेम, करुणा, धर्म, ज्ञान और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मथुरा में हुआ और उन्होंने गोकुल, वृंदावन तथा द्वारका में अनेक दिव्य लीलाएँ कीं। उन्होंने महाभारत युद्ध में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश देकर सम्पूर्ण मानवता को धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया।

श्री कृष्ण चालीसा भगवान श्रीकृष्ण की महिमा, उनकी बाल लीलाओं, गोवर्धन धारण, कालिय नाग दमन, रासलीला तथा भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों का स्मरण कराती है। श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मन में भक्ति, प्रेम और सकारात्मकता का संचार होता है।

॥ दोहा॥

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम ।
अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम ॥

पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज ।
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज ॥

॥ चौपाई ॥

जय यदुनन्दन जय जगवन्दन ।
जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥

जय यशुदा सुत नन्द दुलारे ।
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥

जय नट-नागर नाग नथैया ।
कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥

पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो ।
आओ दीनन कष्ट निवारो ॥

वंशी मधुर अधर धरी तेरी ।
होवे पूर्ण मनोरथ मेरो ॥

आओ हरि पुनि माखन चाखो ।
आज लाज भारत की राखो ॥

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे ।
मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥

रंजित राजिव नयन विशाला ।
मोर मुकुट वैजयंती माला ॥

कुण्डल श्रवण पीतपट आछे ।
कटि किंकणी काछन काछे ॥

नील जलज सुन्दर तनु सोहे ।
छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥10

मस्तक तिलक, अलक घुंघराले ।
आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥

करि पय पान, पुतनहि तारयो ।
अका बका कागासुर मारयो ॥

मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला ।
भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला ॥

सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई ।
मसूर धार वारि वर्षाई ॥

लगत-लगत ब्रज चहन बहायो ।
गोवर्धन नखधारि बचायो ॥

लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई ।
मुख महं चौदह भुवन दिखाई ॥

दुष्ट कंस अति उधम मचायो ।
कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥

नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें ।
चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें ॥

करि गोपिन संग रास विलासा ।
सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥

केतिक महा असुर संहारयो ।
कंसहि केस पकड़ि दै मारयो ॥20

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई ।
उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥

महि से मृतक छहों सुत लायो ।
मातु देवकी शोक मिटायो ॥

भौमासुर मुर दैत्य संहारी ।
लाये षट दश सहसकुमारी ॥

दै भिन्हीं तृण चीर सहारा ।
जरासिंधु राक्षस कहं मारा ॥

असुर बकासुर आदिक मारयो ।
भक्तन के तब कष्ट निवारियो ॥

दीन सुदामा के दुःख टारयो ।
तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो ॥

प्रेम के साग विदुर घर मांगे ।
दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥

लखि प्रेम की महिमा भारी ।
ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥

भारत के पारथ रथ हांके ।
लिए चक्र कर नहिं बल ताके ॥

निज गीता के ज्ञान सुनाये ।
भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये ॥30

मीरा थी ऐसी मतवाली ।
विष पी गई बजाकर ताली ॥

राना भेजा सांप पिटारी ।
शालिग्राम बने बनवारी ॥

निज माया तुम विधिहिं दिखायो ।
उर ते संशय सकल मिटायो ॥

तब शत निन्दा करी तत्काला ।
जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ॥

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई ।
दीनानाथ लाज अब जाई ॥

तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला ।
बढ़े चीर भै अरि मुँह काला ॥

अस नाथ के नाथ कन्हैया ।
डूबत भंवर बचावत नैया ॥

सुन्दरदास आस उर धारी ।
दयादृष्टि कीजै बनवारी ॥

नाथ सकल मम कुमति निवारो ।
क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥

खोलो पट अब दर्शन दीजै ।
बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥40

॥ दोहा ॥

यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥

 

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🕉️ हिंदी भावार्थ (संक्षेप में)

श्री कृष्ण चालीसा में भगवान कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों और लीलाओं का वर्णन किया गया है। भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन से दुख, भय और अज्ञान को दूर कर धर्म, ज्ञान और प्रेम का प्रकाश प्रदान करें।


📚 पौराणिक कथा

कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त करने हेतु भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। उन्होंने बाल्यकाल में पूतना वध, कालिय नाग दमन और गोवर्धन पर्वत धारण जैसी लीलाएँ कीं। महाभारत में उन्होंने अर्जुन के सारथी बनकर धर्म की स्थापना की और भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान प्रदान किया।


🪔 पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. दीपक एवं धूप प्रज्वलित करें।
  4. तुलसी दल, माखन-मिश्री एवं पुष्प अर्पित करें।
  5. श्रीकृष्ण मंत्र का जप करें।
  6. श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करें।
  7. आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

🌼 पूजा सामग्री

  • भगवान श्रीकृष्ण का चित्र या प्रतिमा
  • तुलसी दल
  • माखन-मिश्री
  • धूप एवं दीप
  • चंदन
  • पुष्पमाला
  • पंचामृत
  • नैवेद्य
  • गंगाजल

📿 मंत्र

मूल मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

कृष्ण मंत्र

क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा॥

महामंत्र

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥


🌟 महत्व

  • भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन।
  • भक्ति, प्रेम और श्रद्धा को बढ़ाने वाला।
  • मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है।
  • धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
  • गीता के आदर्शों को जीवन में अपनाने का माध्यम है।

✨ लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • मन की शांति प्राप्त होती है।
  • नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
  • भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस मिलता है।
  • भगवान कृष्ण की कृपा का अनुभव होता है।

⏰ पूजा का सही समय

  • प्रतिदिन प्रातःकाल
  • संध्याकाल
  • बुधवार
  • गुरुवार
  • जन्माष्टमी
  • एकादशी तिथि
  • गीता जयंती

🌺 प्रेरणादायक संदेश

“भगवान श्रीकृष्ण हमें सिखाते हैं कि जीवन में कर्म करते रहना ही सच्चा धर्म है। निष्काम भाव से किया गया कार्य ही सफलता और शांति का मार्ग बनता है।”


❓ FAQ

1. श्री कृष्ण चालीसा किसकी स्तुति है?

भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करती है।

2. श्री कृष्ण चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

प्रातःकाल, संध्याकाल या एकादशी के दिन।

3. क्या रोज श्री कृष्ण चालीसा पढ़ सकते हैं?

हाँ, प्रतिदिन श्रद्धा से पाठ किया जा सकता है।

4. श्रीकृष्ण का प्रिय भोग क्या है?

माखन, मिश्री, पंजीरी और तुलसी दल।

5. कृष्ण मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?

108 बार जप करना शुभ माना जाता है।

6. जन्माष्टमी पर चालीसा पाठ का क्या महत्व है?

इस दिन पाठ करने से विशेष पुण्य और कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

7. श्रीकृष्ण किसके अवतार हैं?

भगवान विष्णु के आठवें अवतार।

8. क्या श्री कृष्ण चालीसा बच्चों को भी सिखाई जा सकती है?

हाँ, इससे उनमें भक्ति और नैतिक मूल्यों का विकास होता है।

9. श्रीकृष्ण की उपासना से क्या लाभ मिलता है?

मन की शांति, भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक उन्नति।

10. श्रीकृष्ण का सबसे प्रसिद्ध मंत्र कौन-सा है?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥


📣 जयघोष

🦚 बोलो श्री कृष्ण भगवान की जय!
🙏 अच्युत भगवान की जय!
🌸 नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!
🪔 यशोदा मैया की जय!
🦚 लड्डू गोपाल की जय!
🌺 श्री राधा रानी की जय!
💛 बांके बिहारी लाल की जय!
🌿 वृंदावन धाम की जय!
📿 भक्त मीरा की जय!
🙏 जय श्री कृष्ण! राधे-राधे!

 

आरती कुंजबिहारी की | आरती: ॐ जय जगदीश हरे | मधुराष्टकम्: अधरं मधुरं वदनं मधुरं | छोटी छोटी गैया छोटे छोटे ग्वाल – कृष्ण भजन | नन्द के आनंद भयो – जन्माष्टमी भजन |  श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी – भजन | आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन – भोग आरती | श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं आरती बाल कृष्ण की कीजै | अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं – भजन | श्री सत्यनारायण जी कथा | श्री राम लला की आरती | रघुवर श्री रामचन्द्र जी की आरती

 

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