Mata Parvati Ji Ki Aarti

Mata Parvati Ji Ki Aarti
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माता पार्वती – आरती (Mata Parvati Ji Ki Aarti)

“जय पार्वती माता” माता पार्वती की अत्यंत लोकप्रिय आरती है। इसमें माता पार्वती के गौरी, भवानी, जगदम्बा और आदिशक्ति स्वरूप का गुणगान किया गया है। आरती में उन्हें संसार का कल्याण करने वाली, सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली तथा भक्तों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में वंदन किया जाता है।

यह आरती विशेष रूप से सोमवार, हरतालिका तीज, गौरी पूजन, नवरात्रि, श्रावण मास तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धापूर्वक गाई जाती है।

॥ आरती ॥

ॐ जय पार्वती माता,
मैया, जय पार्वती माता,
ब्रह्मा सनातन देवी,
शुभ फल की दाता ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

अरिकुल कंटक नासनि,
निज सेवक त्राता,
जगजननी जगदम्बा,
हरिहर गुण गाता ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

सिंह को वहान साजे,
कुंडल है साथा,
देव वधू जस गावत,
नृत्य करत ता था ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

सतयुग रूप शील अतिसुंदर,
नाम सती कहलाता,
हेमाचंल घर जन्मी,
सखियाँ संगराता ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे,
हेमाचंल स्थाता,
सहस्त्र भुजा तनु धरिके,
चक्र लियो हाथा ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

सृष्टि रूप तुही है जननी,
शिव संग रंगराता,
नन्दी भृंगी बीन लही,
सारा जग मदमाता ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

देवन अरज करत हम,
चरण ध्यान लाता,
तेरी कृपा रहे तो,
मन नहीं भरमाता ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

मैया जी की आरती,
भक्ति भाव से जो नर गाता,
नित्य सुखी रह करके,
सुख संपत्ति पाता ।
॥ ॐ जय पार्वती माता… ॥

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🕉️ माता पार्वती का परिचय

माता पार्वती भगवान शिव की अर्धांगिनी तथा आदिशक्ति का सौम्य स्वरूप हैं। उन्हें अनेक नामों से पूजा जाता है—

  • 🌺 गौरी
  • 🌺 उमा
  • 🌺 गिरिजा
  • 🌺 भवानी
  • 🌺 अन्नपूर्णा
  • 🌺 दुर्गा
  • 🌺 अंबिका
  • 🌺 जगदम्बा

पौराणिक परिचय:

  • पिता: हिमवान (हिमालयराज)
  • माता: मेना देवी
  • पति: भगवान शिव
  • पुत्र: श्री गणेश एवं भगवान कार्तिकेय
  • निवास: कैलाश पर्वत

🌸 आरती का भावार्थ

इस आरती में माता पार्वती की करुणा, मातृत्व, शक्ति और मंगलमय स्वरूप का वर्णन किया गया है।

आरती का मुख्य संदेश है—

  • माता समस्त संसार की पालनकर्ता हैं।
  • वे भक्तों के जीवन में सुख, शांति और मंगल का संचार करती हैं।
  • श्रद्धा और विश्वास से की गई पूजा जीवन में सकारात्मकता लाती है।
  • शिव और शक्ति का मिलन सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है।

🪔 पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. माता पार्वती एवं भगवान शिव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  3. घी का दीपक और धूप जलाएँ।
  4. कुमकुम, अक्षत, पुष्प और चुनरी अर्पित करें।
  5. माता को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
  6. “ॐ पार्वत्यै नमः” मंत्र का जप करें।
  7. श्रद्धापूर्वक माता पार्वती की आरती करें।
  8. अंत में प्रसाद अर्पित कर परिवार में वितरित करें।

🌿 पूजा सामग्री

  • माता पार्वती एवं शिवजी का चित्र
  • लाल या पीले पुष्प
  • कुमकुम
  • अक्षत
  • चंदन
  • धूप
  • घी का दीपक
  • नारियल
  • चुनरी
  • श्रृंगार सामग्री (सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी)
  • फल एवं मिठाई
  • पंचामृत
  • गंगाजल

🕉️ प्रमुख मंत्र

पार्वती बीज मंत्र

॥ ॐ ह्रीं पार्वत्यै नमः ॥

पार्वती मंत्र

॥ ॐ पार्वत्यै नमः ॥

शिव-पार्वती संयुक्त मंत्र

॥ ॐ गौरीशङ्कराय नमः ॥


🌼 माता पार्वती आरती का महत्व

  • अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
  • दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य का प्रतीक है।
  • परिवार में सुख, शांति और सद्भाव की भावना को प्रोत्साहित करती है।
  • नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और तपस्या की प्रेरणा देती है।
  • हरतालिका तीज, नवरात्रि और सोमवार के पूजन में विशेष स्थान रखती है।

🌷 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लाभ

श्रद्धा और भक्ति से माता पार्वती की आरती करने पर भक्तों का विश्वास है कि—

  • वैवाहिक जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है।
  • मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • परिवार में सुख-समृद्धि और सौहार्द बना रहता है।
  • माता पार्वती की कृपा और संरक्षण की भावना मजबूत होती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति में वृद्धि होती है।

नोट: ये लाभ धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी निश्चित सांसारिक या चिकित्सीय परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।


⏰ आरती का सही समय

  • 🌅 प्रातःकाल
  • 🌇 सायंकाल
  • 🌿 प्रत्येक सोमवार
  • 💐 हरतालिका तीज
  • 🌸 नवरात्रि
  • 🔱 महाशिवरात्रि
  • 🌿 श्रावण मास

🌟 प्रेरणादायक संदेश

“माता पार्वती का जीवन हमें सिखाता है कि धैर्य, तप, प्रेम और अटूट विश्वास से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। सच्ची भक्ति केवल पूजा में नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, सम्मान और सेवा के भाव में भी प्रकट होती है।”


❓FAQ

1. माता पार्वती की आरती कब करनी चाहिए?

प्रातःकाल, सायंकाल, सोमवार, हरतालिका तीज, नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से।

2. क्या अविवाहित कन्याएँ माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं?

हाँ, धार्मिक मान्यता के अनुसार अविवाहित कन्याएँ योग्य जीवनसाथी की कामना से माता पार्वती की पूजा करती हैं।

3. क्या विवाहित महिलाएँ यह आरती कर सकती हैं?

हाँ, विवाहित महिलाएँ अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति की कामना से यह आरती करती हैं।

4. माता पार्वती का प्रमुख मंत्र कौन-सा है?

॥ ॐ ह्रीं पार्वत्यै नमः ॥ तथा ॥ ॐ पार्वत्यै नमः ॥

5. क्या शिव और पार्वती की संयुक्त पूजा करनी चाहिए?

हाँ, शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा दाम्पत्य सौहार्द, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक मानी जाती है।

6. माता पार्वती का वाहन क्या है?

माता पार्वती के विभिन्न स्वरूपों के अनुसार वाहन भिन्न हो सकते हैं। उनके सौम्य गौरी स्वरूप में वे प्रायः भगवान शिव के साथ नंदी के समीप दर्शाई जाती हैं, जबकि दुर्गा स्वरूप में सिंह उनका प्रमुख वाहन माना जाता है।

7. हरतालिका तीज का माता पार्वती से क्या संबंध है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। उसी स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है।

8. माता पार्वती की आरती का मुख्य संदेश क्या है?

प्रेम, धैर्य, तपस्या, परिवार के प्रति समर्पण, करुणा और ईश्वर में अटूट विश्वास।


🚩जयघोष

॥ जय माता पार्वती ॥
॥ जय गौरी माता ॥
॥ जय उमा महेश्वरी ॥
॥ जय गिरिराजकुमारी ॥
॥ जय भवानी माता ॥
॥ जय जगदम्बे माता ॥
॥ हर हर महादेव, जय माता पार्वती ॥
॥ बोलो गौरी शंकर भगवान की जय ॥🙏🙏

 

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