Ambe tu hai Jagdambe Kali

Ambe tu hai Jagdambe Kali
Ambe tu hai Jagdambe Kali

 

अम्बे तू है जगदम्बे काली (Ambe tu hai Jagdambe Kali)

‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ माँ दुर्गा की सर्वाधिक लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इसका पाठ शुक्रवार, चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि, अष्टमी, माता की चौकी और देवी जागरण जैसे शुभ अवसरों पर विशेष श्रद्धा के साथ किया जाता है। यह आरती देवी के शक्ति, करुणा, संरक्षण और अधर्म के विनाश करने वाले स्वरूप की स्तुति करती है। भारत के अनेक मंदिरों, घरों और शक्ति उपासना स्थलों में इसे विशेष श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

॥ आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये माँ भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

मैया तेरे भक्त जनो पर,
भीर पडी है भारी माँ ।
भीर पडी है भारी…

दानव दल पर टूट पडो,
माँ करके सिंह सवारी ।
सौ-सौ सिंहो से तुम बलशाली,
अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पलमे संहारती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

माँ बेटे का है इस जग मे,
बडा ही निर्मल नाता ।
माँ बडा ही निर्मल नाता…

पूत – कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखडे निवारती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

नही मांगते धन और दौलत,
न चांदी न सोना माँ ।
न चांदी न सोना…

हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,
इक छोटा सा कोना ॥
सबकी बिगडी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियो के सत को सवांरती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

चरण शरण मे खडे तुम्हारी,
ले पूजा की थाली ।
माँ, ले पूजा की थाली…
वरद हस्त, सर पर रख दो,
माँ, सकंट हरने वाली ।
माँ भर दो भक्ति रस प्याली,
अष्ट भुजाओ वाली,
भक्तो के कारज तू ही सारती ।
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतारें, तेरी आरती ॥

 

दुर्गा चालीसा | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रं | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | माता के भजन

 

“अम्बे तू है जगदम्बे काली” आरती क्या है?

यह आरती देवी माँ के दो प्रमुख स्वरूपों का गुणगान करती है—

  • माँ जगदम्बा – सम्पूर्ण सृष्टि की पालनकर्ता और करुणामयी माता।
  • माँ काली – अधर्म, अहंकार और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली आदिशक्ति।

इस आरती में भक्त माँ से रक्षा, सुख, शांति, साहस और जीवन में सही मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है।


आरती (प्रारम्भिक पंक्तियाँ)

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥


पहली पंक्ति का सरल अर्थ

“अम्बे तू है जगदम्बे काली”

  • अम्बे – माँ का स्नेहमयी स्वरूप।
  • जगदम्बे – सम्पूर्ण जगत की माता।
  • काली – अधर्म और अज्ञान का नाश करने वाली शक्ति।

भावार्थ:
हे माँ! आप समस्त सृष्टि की जननी हैं और अपने भक्तों की रक्षा करने वाली परम शक्ति हैं।


“जय दुर्गे खप्पर वाली”

यहाँ माँ दुर्गा के उस स्वरूप का वर्णन है जो दुष्ट शक्तियों का नाश कर धर्म की रक्षा करती हैं। खप्पर उनके उग्र एवं शक्तिशाली रूप का प्रतीक माना जाता है।


“तेरे ही गुण गायें…”

भक्त माँ की महिमा का गुणगान करते हुए अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करता है तथा उनकी आरती उतारता है।


आरती का महत्व

  • माँ दुर्गा और माँ काली के प्रति भक्ति और समर्पण प्रकट करने का माध्यम।
  • साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा की प्रेरणा।
  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य और शक्ति प्राप्त करने की भावना।
  • परिवार में सुख, शांति और मंगल की कामना।
  • अधर्म पर धर्म की विजय का स्मरण।

माँ दुर्गा और माँ काली के बारे में रोचक तथ्य

1. जगदम्बा का अर्थ

“जगदम्बा” का अर्थ है सम्पूर्ण जगत की माँ

2. माँ काली का स्वरूप

माँ काली समय, शक्ति और परिवर्तन का प्रतीक मानी जाती हैं। उनका उग्र रूप नकारात्मकता और अहंकार के विनाश का संदेश देता है।

3. सिंह वाहन

माँ दुर्गा का सिंह साहस, निर्भयता और धर्म की विजय का प्रतीक है।

4. नवदुर्गा

नवरात्रि में माँ के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।

5. शक्ति की आराधना

देवी की उपासना का मूल संदेश है कि शक्ति का उपयोग सदैव धर्म, न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए।


यह आरती कब गाई जाती है?

  • नवरात्रि के नौ दिनों में
  • दुर्गा पूजा
  • काली पूजा
  • माता की चौकी
  • देवी जागरण
  • शुक्रवार
  • अष्टमी और नवमी
  • किसी भी शक्ति उपासना या देवी पूजा के समापन पर

इस आरती से मिलने वाली जीवन-शिक्षाएँ

  • कठिनाइयों का सामना साहस से करें।
  • सत्य और धर्म का साथ कभी न छोड़ें।
  • अहंकार और बुराइयों पर विजय पाने का प्रयास करें।
  • करुणा और शक्ति का संतुलन बनाए रखें।
  • ईश्वर पर विश्वास रखते हुए सकारात्मक कर्म करें।

प्रेरणादायक संदेश

“माँ दुर्गा और माँ काली हमें यह सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति केवल बाहरी बल में नहीं, बल्कि साहस, करुणा, धैर्य और धर्म के पालन में निहित है।”

🙏 ॥ जय माता दी ॥
🌺 ॥ जय अम्बे जगदम्बे ॥
🪔 ॥ जय माँ दुर्गा ॥
⚔️ ॥ जय माँ काली ॥

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*