Gajendra Moksham Stotram

Gajendra Moksham Stotram
गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र (श्री विष्णु)

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र – श्री विष्णु (Gajendra Moksham Stotram – Shri Vishnu)

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र भगवान श्रीहरि विष्णु की महिमा का अत्यंत दिव्य और मोक्षदायक स्तोत्र है। इसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध (अध्याय 2–4) में मिलता है। जब गजराज गजेन्द्र ग्राह (मगरमच्छ) के बंधन में फँसकर असहाय हो गए, तब उन्होंने पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान विष्णु का स्मरण किया। उनकी करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु स्वयं गरुड़ पर आरूढ़ होकर आए और गजेन्द्र को मुक्त कर मोक्ष प्रदान किया। यह कथा पूर्ण शरणागति, भक्ति और ईश्वर-कृपा का सर्वोत्तम उदाहरण मानी जाती है।

भगवान विष्णु त्रिदेवों में पालनकर्ता माने जाते हैं। वे धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण हेतु समय-समय पर विभिन्न अवतार धारण करते हैं। श्रीराम, श्रीकृष्ण, नरसिंह, वामन आदि उनके प्रमुख अवतार हैं। गजेंद्र मोक्ष प्रसंग में भगवान विष्णु अपने भक्त की रक्षा हेतु तत्काल प्रकट होकर उसे मोक्ष प्रदान करते हैं।

॥ सम्पूर्ण स्तोत्र ॥

श्री शुक उवाच 
एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि ।
जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम ॥१॥

गजेन्द्र उवाच 
ऊं नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम ।
पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥२॥

यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं ।
योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम ॥३॥

यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितं
क्वचिद्विभातं क्व च तत्तिरोहितम ।
अविद्धदृक साक्ष्युभयं तदीक्षते
स आत्म मूलोsवत् मां परात्परः ॥४॥

कालेन पंचत्वमितेषु कृत्स्नशो
लोकेषु पालेषु च सर्व हेतुषु ।
तमस्तदाऽऽऽसीद गहनं गभीरं
यस्तस्य पारेsभिविराजते विभुः ॥५॥

न यस्य देवा ऋषयः पदं विदु-
र्जन्तुः पुनः कोsर्हति गन्तुमीरितुम ।
यथा नटस्याकृतिभिर्विचेष्टतो
दुरत्ययानुक्रमणः स मावतु ॥६॥

दिदृक्षवो यस्य पदं सुमंगलम
विमुक्त संगा मुनयः सुसाधवः ।
चरन्त्यलोकव्रतमव्रणं वने
भूतात्मभूता सुहृदः स मे गतिः ॥७॥

न विद्यते यस्य न जन्म कर्म वा
न नाम रूपे गुणदोष एव वा ।
तथापि लोकाप्ययसम्भवाय यः
स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ॥८॥

तस्मै नमः परेशाय ब्रह्मणेsनन्तशक्तये ।
अरूपायोरुरूपाय नम आश्चर्य कर्मणे ॥९॥

नम आत्म प्रदीपाय साक्षिणे परमात्मने ।
नमो गिरां विदूराय मनसश्चेतसामपि ॥१०॥

सत्त्वेन प्रतिलभ्याय नैष्कर्म्येण विपश्चिता ।
नमः कैवल्यनाथाय निर्वाणसुखसंविदे ॥११॥

नमः शान्ताय घोराय मूढाय गुण धर्मिणे ।
निर्विशेषाय साम्याय नमो ज्ञानघनाय च ॥१२॥

क्षेत्रज्ञाय नमस्तुभ्यं सर्वाध्यक्षाय साक्षिणे ।
पुरुषायात्ममूलाय मूलप्रकृतये नमः ॥१३॥

सर्वेन्द्रियगुणद्रष्ट्रे सर्वप्रत्ययहेतवे ।
असताच्छाययोक्ताय सदाभासाय ते नमः ॥१४॥

नमो नमस्तेsखिल कारणाय
निष्कारणायाद्भुत कारणाय ।
सर्वागमान्मायमहार्णवाय
नमोपवर्गाय परायणाय ॥१५॥

गुणारणिच्छन्न चिदूष्मपाय
तत्क्षोभविस्फूर्जित मानसाय ।
नैष्कर्म्यभावेन विवर्जितागम-
स्वयंप्रकाशाय नमस्करोमि ॥१६॥

मादृक्प्रपन्नपशुपाशविमोक्षणाय
मुक्ताय भूरिकरुणाय नमोsलयाय ।
स्वांशेन सर्वतनुभृन्मनसि प्रतीत-
प्रत्यग्दृशे भगवते बृहते नमस्ते ॥१७॥

आत्मात्मजाप्तगृहवित्तजनेषु सक्तै-
र्दुष्प्रापणाय गुणसंगविवर्जिताय ।
मुक्तात्मभिः स्वहृदये परिभाविताय
ज्ञानात्मने भगवते नम ईश्वराय ॥१८॥

यं धर्मकामार्थविमुक्तिकामा
भजन्त इष्टां गतिमाप्नुवन्ति ।
किं त्वाशिषो रात्यपि देहमव्ययं
करोतु मेsदभ्रदयो विमोक्षणम् ॥१९॥

एकान्तिनो यस्य न कंचनार्थ
वांछन्ति ये वै भगवत्प्रपन्नाः ।
अत्यद्भुतं तच्चरितं सुमंगलं
गायन्त आनन्द समुद्रमग्नाः ॥२०॥

तमक्षरं ब्रह्म परं परेश-
मव्यक्तमाध्यात्मिकयोगगम्यम ।
अतीन्द्रियं सूक्ष्ममिवातिदूर-
मनन्तमाद्यं परिपूर्णमीडे ॥२१॥

यस्य ब्रह्मादयो देवा वेदा लोकाश्चराचराः ।
नामरूपविभेदेन फल्ग्व्या च कलया कृताः ॥२२॥

यथार्चिषोsग्नेः सवितुर्गभस्तयो
निर्यान्ति संयान्त्यसकृत् स्वरोचिषः ।
तथा यतोsयं गुणसंप्रवाहो
बुद्धिर्मनः खानि शरीरसर्गाः ॥२३॥

स वै न देवासुरमर्त्यतिर्यंग
न स्त्री न षण्डो न पुमान न जन्तुः ।
नायं गुणः कर्म न सन्न चासन
निषेधशेषो जयतादशेषः ॥२४॥

जिजीविषे नाहमिहामुया कि-
मन्तर्बहिश्चावृतयेभयोन्या ।
इच्छामि कालेन न यस्य विप्लव-
स्तस्यात्मलोकावरणस्य मोक्षम ॥२५॥

सोsहं विश्वसृजं विश्वमविश्वं विश्ववेदसम ।
विश्वात्मानमजं ब्रह्म प्रणतोsस्मि परं पदम् ॥२६॥

योगरन्धित कर्माणो हृदि योगविभाविते ।
योगिनो यं प्रपश्यन्ति योगेशं तं नतोsस्म्यहम् ॥२७॥

नमो नमस्तुभ्यमसह्यवेग-
शक्तित्रयायाखिलधीगुणाय ।
प्रपन्नपालाय दुरन्तशक्तये
कदिन्द्रियाणामनवाप्यवर्त्मने ॥२८॥

नायं वेद स्वमात्मानं यच्छ्क्त्याहंधिया हतम् ।
तं दुरत्ययमाहात्म्यं भगवन्तमितोsस्म्यहम् ॥२९॥

श्री शुकदेव उवाच –
एवं गजेन्द्रमुपवर्णितनिर्विशेषं
ब्रह्मादयो विविधलिंगभिदाभिमानाः ।
नैते यदोपससृपुर्निखिलात्मकत्वात
तत्राखिलामरमयो हरिराविरासीत् ॥३०॥

तं तद्वदार्त्तमुपलभ्य जगन्निवासः
स्तोत्रं निशम्य दिविजैः सह संस्तुवद्भि : ।
छन्दोमयेन गरुडेन समुह्यमान –
श्चक्रायुधोsभ्यगमदाशु यतो गजेन्द्रः ॥३१॥

सोsन्तस्सरस्युरुबलेन गृहीत आर्त्तो
दृष्ट्वा गरुत्मति हरिम् ख उपात्तचक्रम ।
उत्क्षिप्य साम्बुजकरं गिरमाह कृच्छा –
नारायणाखिलगुरो भगवन्नमस्ते ॥३२॥

तं वीक्ष्य पीडितमजः सहसावतीर्य
सग्राहमाशु सरसः कृपयोज्जहार ।
ग्राहाद् विपाटितमुखादरिणा गजेन्द्रं
सम्पश्यतां हरिरमूमुच दुस्त्रियाणाम् ॥३३॥

श्री गजेन्द्र कृत भगवान का स्तवन

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🕉️ हिंदी सरल भावार्थ

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का मुख्य संदेश है कि जब संसार के सभी सहारे समाप्त हो जाएँ, तब भी भगवान का सहारा कभी समाप्त नहीं होता।

  • गजेन्द्र संकट में फँसे जीवात्मा का प्रतीक हैं।
  • ग्राह (मगरमच्छ) संसार के दुःख, कर्म और मोह का प्रतीक है।
  • सरोवर भौतिक संसार का प्रतीक है।
  • भगवान विष्णु परम आश्रय और मुक्ति के दाता हैं।
  • पूर्ण समर्पण से भगवान अवश्य सहायता करते हैं।

यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा और शरणागति से असंभव संकट भी दूर हो सकते हैं।


📜 पौराणिक कथा

प्राचीन काल में इन्द्रद्युम्न नामक एक महान राजा भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक बार अगस्त्य ऋषि के आगमन पर उचित सम्मान न कर पाने के कारण उन्हें हाथी बनने का श्राप मिला।

अगले जन्म में वे गजेन्द्र नामक हाथी बने। एक दिन वे अपने परिवार सहित एक सरोवर में स्नान कर रहे थे। तभी एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। हजारों वर्षों तक संघर्ष के बाद जब सारी शक्ति समाप्त हो गई, तब उन्होंने भगवान विष्णु को पुकारा।

भगवान विष्णु तत्काल गरुड़ पर सवार होकर आए और अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर गजेन्द्र को मुक्त कर दिया। मगरमच्छ भी पूर्वजन्म का गंधर्व हूहू था, जिसे श्राप मिला था। भगवान की कृपा से दोनों को मुक्ति प्राप्त हुई।


🪔 पूजा विधि

  1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. घी का दीपक एवं धूप जलाएँ।
  4. तुलसी दल अर्पित करें।
  5. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
  6. गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
  7. अंत में विष्णु आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

🌼 पूजा सामग्री

  • भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा
  • तुलसी दल
  • पीले पुष्प
  • धूप एवं दीप
  • घी
  • चंदन
  • अक्षत
  • शंख
  • पंचामृत
  • नैवेद्य (फल एवं मिष्ठान)

📿 मंत्र

मूल मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

विष्णु मंत्र

ॐ नमो नारायणाय॥

गजेंद्र मोक्ष स्मरण मंत्र

नारायणाखिलगुरो भगवन्नमस्ते॥


🌟 महत्व

  • संकट निवारण का महान स्तोत्र।
  • पूर्ण शरणागति का सर्वोच्च उदाहरण।
  • विष्णु भक्ति को दृढ़ करता है।
  • मानसिक शांति एवं आत्मबल प्रदान करता है।
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

✨ लाभ

  • भय एवं चिंता दूर होती है।
  • नकारात्मकता का नाश होता है।
  • आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • विष्णु कृपा प्राप्त होती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य मिलता है।
  • कर्मबंधन से मुक्ति की प्रेरणा मिलती है।

⏰ पूजा का सही समय

  • ब्रह्ममुहूर्त
  • गुरुवार
  • एकादशी
  • वैकुण्ठ एकादशी
  • देवउठनी एकादशी
  • संकट या मानसिक तनाव के समय
  • विष्णु पूजा के विशेष अवसरों पर

🌷 प्रेरणादायक संदेश

गजेंद्र मोक्ष की कथा हमें सिखाती है कि जीवन में कभी भी केवल अपनी शक्ति पर अहंकार नहीं करना चाहिए। जब मनुष्य विनम्र होकर भगवान की शरण में जाता है, तब ईश्वर उसकी सहायता अवश्य करते हैं। कठिन से कठिन परिस्थिति में भी विश्वास और भक्ति बनाए रखना ही सच्ची विजय का मार्ग है।


 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र किस ग्रंथ में वर्णित है?

श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में।

2. गजेंद्र कौन थे?

वे पूर्व जन्म के राजा इन्द्रद्युम्न थे।

3. ग्राह कौन था?

पूर्व जन्म का गंधर्व हूहू।

4. इस स्तोत्र के अधिष्ठाता देव कौन हैं?

भगवान श्री विष्णु।

5. गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

गुरुवार, एकादशी या संकट के समय।

6. क्या इसका पाठ दैनिक किया जा सकता है?

हाँ, दैनिक पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

7. क्या यह स्तोत्र भय दूर करता है?

हाँ, यह मानसिक बल और आत्मविश्वास प्रदान करता है।

8. क्या इससे विष्णु कृपा प्राप्त होती है?

हाँ, श्रद्धा से पाठ करने पर विष्णु कृपा प्राप्त होती है।

9. क्या बच्चों को यह कथा सुनानी चाहिए?

हाँ, इससे भक्ति और नैतिक शिक्षा मिलती है।

10. गजेंद्र मोक्ष का मुख्य संदेश क्या है?

पूर्ण शरणागति और ईश्वर पर अटूट विश्वास।


📣 जयघोष

🚩 जय श्रीहरि विष्णु भगवान की जय!
🚩 श्री लक्ष्मी नारायण भगवान की जय!
🚩 गरुड़ध्वज भगवान की जय!
🚩 गजेन्द्र मोक्षदाता श्रीहरि की जय!
🚩 ॐ नमो नारायणाय! 🙏🙏

गजेंद्र और ग्राह मुक्ति कथा | श्री राम स्तुति | श्री राम चालीसा | ॐ जय जगदीश हरे आरती | श्री रामाष्टकम् | श्री सत्यनारायण कथा | श्री रामावतार | आरती कुंजबिहारी | रघुवर श्री रामचन्द्र जी की आरती | शिव आरती

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