Shri Ram Chalisa

Shri Ram Chalisa
Shri Ram Chalisa

श्री राम चालीसा (Shri Ram Chalisa)

श्री राम चालीसा भगवान श्रीराम की महिमा, गुणों, आदर्श जीवन और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन करने वाली अत्यंत लोकप्रिय स्तुति है। श्रद्धालु इसका पाठ विशेष रूप से राम नवमी, मंगलवार, गुरुवार, या प्रतिदिन सुबह-शाम करते हैं।

॥ दोहा ॥
आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं ।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणं ॥

बाली निर्दलं समुद्र तरणं लङ्कापुरी दाहनम् ।
पश्चद्रावनं कुम्भकर्णं हननं एतद्धि रामायणं ॥

 

॥ चौपाई ॥
श्री रघुबीर भक्त हितकारी ।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई ।
ता सम भक्त और नहिं होई ॥

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं ।
ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं पाहीं ॥

जय जय जय रघुनाथ कृपाला ।
सदा करो सन्तन प्रतिपाला ॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना ।
जासु प्रभाव तिहूँ पुर जाना ॥

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला ।
रावण मारि सुरन प्रतिपाला ॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाईं ।
दीनन के हो सदा सहाई ॥

ब्रह्मादिक तव पार न पावैं ।
सदा ईश तुम्हरो यश गावैं ॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी ।
तुम भक्तन की लज्जा राखी ॥

गुण गावत शारद मन माहीं ।
सुरपति ताको पार न पाहीं ॥ 10 ॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई ।
ता सम धन्य और नहिं होई ॥

राम नाम है अपरम्पारा ।
चारिहु वेदन जाहि पुकारा ॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हों ।
तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हों ॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा ।
महि को भार शीश पर धारा ॥

फूल समान रहत सो भारा ।
पावत कोउ न तुम्हरो पारा ॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो ।
तासों कबहुँ न रण में हारो ॥

नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा ।
सुमिरत होत शत्रु कर नाशा ॥

लषन तुम्हारे आज्ञाकारी ।
सदा करत सन्तन रखवारी ॥

ताते रण जीते नहिं कोई ।
युद्ध जुरे यमहूँ किन होई ॥

महा लक्ष्मी धर अवतारा ।
सब विधि करत पाप को छारा ॥ 20 ॥

सीता राम पुनीता गायो ।
भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ॥

घट सों प्रकट भई सो आई ।
जाको देखत चन्द्र लजाई ॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत ।
नवो निद्धि चरणन में लोटत ॥

सिद्धि अठारह मंगल कारी ।
सो तुम पर जावै बलिहारी ॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई ।
सो सीतापति तुमहिं बनाई ॥

इच्छा ते कोटिन संसारा ।
रचत न लागत पल की बारा ॥

जो तुम्हरे चरनन चित लावै ।
ताको मुक्ति अवसि हो जावै ॥

सुनहु राम तुम तात हमारे ।
तुमहिं भरत कुल- पूज्य प्रचारे ॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे ।
तुम गुरु देव प्राण के प्यारे ॥

जो कुछ हो सो तुमहीं राजा ।
जय जय जय प्रभु राखो लाजा ॥ 30 ॥

रामा आत्मा पोषण हारे ।
जय जय जय दशरथ के प्यारे ॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा ।
निगुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा ॥

सत्य सत्य जय सत्य- ब्रत स्वामी ।
सत्य सनातन अन्तर्यामी ॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै ।
सो निश्चय चारों फल पावै ॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं ।
तुमने भक्तहिं सब सिद्धि दीन्हीं ॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा ।
नमो नमो जय जापति भूपा ॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा ।
नाम तुम्हार हरत संतापा ॥

सत्य शुद्ध देवन मुख गाया ।
बजी दुन्दुभी शंख बजाया ॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन ।
तुमहीं हो हमरे तन मन धन ॥

याको पाठ करे जो कोई ।
ज्ञान प्रकट ताके उर होई ॥ 40 ॥

आवागमन मिटै तिहि केरा ।
सत्य वचन माने शिव मेरा ॥

और आस मन में जो ल्यावै ।
तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै ॥

साग पत्र सो भोग लगावै ।
सो नर सकल सिद्धता पावै ॥

अन्त समय रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥

श्री हरि दास कहै अरु गावै ।
सो वैकुण्ठ धाम को पावै ॥

॥ दोहा ॥
सात दिवस जो नेम कर पाठ करे चित लाय ।
हरिदास हरिकृपा से अवसि भक्ति को पाय ॥

राम चालीसा जो पढ़े रामचरण चित लाय ।
जो इच्छा मन में करै सकल सिद्ध हो जाय ॥

 

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श्री राम चालीसा क्या है?

श्री राम चालीसा 40 चौपाइयों (इसलिए “चालीसा”) और प्रारंभ व अंत के दोहों से युक्त एक भक्तिपूर्ण रचना है। इसमें भगवान श्रीराम के:

  • जन्म,
  • बाल्यकाल,
  • वनवास,
  • सीता स्वयंवर,
  • रावण वध,
  • रामराज्य,
  • तथा उनके दिव्य गुणों

का सुंदर वर्णन किया जाता है।


श्री राम चालीसा का महत्व

  • श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कराती है।
  • मन में शांति, साहस और सकारात्मकता लाती है।
  • सत्य, धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
  • परिवार में प्रेम, सम्मान और सद्भाव बनाए रखने की सीख देती है।
  • भक्तों के मन में श्रीराम के प्रति श्रद्धा और भक्ति को दृढ़ करती है।

श्री राम चालीसा का सरल भावार्थ:

पूरी चालीसा का मुख्य संदेश यह है कि:

  • भगवान श्रीराम धर्म की रक्षा के लिए अवतरित हुए।
  • उन्होंने सदैव सत्य और न्याय का पालन किया।
  • उन्होंने माता-पिता की आज्ञा का सम्मान करते हुए वनवास स्वीकार किया।
  • मित्रता का आदर्श स्थापित किया (सुग्रीव, निषादराज, विभीषण)।
  • भक्तों पर सदैव कृपा की (हनुमान, शबरी, केवट आदि)।
  • अंततः अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की।

श्री राम चालीसा से मिलने वाली जीवन-शिक्षाएँ

1. वचन का पालन

श्रीराम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राजसिंहासन छोड़कर वनवास स्वीकार किया।

सीख: कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और कर्तव्य का पालन करें।


2. आदर्श नेतृत्व

रामराज्य में सभी के साथ न्याय, करुणा और समानता का व्यवहार किया गया।

सीख: एक अच्छा नेता वही है जो सबका हित सोचता है।


3. सच्ची मित्रता

श्रीराम ने सुग्रीव, हनुमान और विभीषण जैसे मित्रों पर विश्वास किया।

सीख: मित्रता विश्वास और धर्म पर आधारित होनी चाहिए।


4. विनम्रता

इतने शक्तिशाली होने के बावजूद श्रीराम सदैव विनम्र रहे।

सीख: महानता के साथ विनम्रता भी आवश्यक है।


5. अधर्म पर विजय

रावण अत्यंत विद्वान था, लेकिन अहंकार के कारण उसका पतन हुआ।

सीख: ज्ञान तभी सार्थक है जब उसके साथ विनम्रता और धर्म हो।


श्री राम चालीसा का पाठ कब करें?

  • 🌅 प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल
  • 🎉 राम नवमी
  • 🚩 विजयदशमी
  • 🪔 दीपावली
  • 📖 रामायण या सुंदरकाण्ड के पाठ के बाद
  • 🙏 मंगलवार एवं गुरुवार

श्री राम चालीसा का आध्यात्मिक संदेश

श्री राम चालीसा हमें केवल भगवान की स्तुति करना नहीं सिखाती, बल्कि यह भी सिखाती है कि:

  • सत्य कभी न छोड़ें।
  • माता-पिता और गुरु का सम्मान करें।
  • अपने वचनों का पालन करें।
  • सभी के साथ प्रेम और करुणा से व्यवहार करें।
  • शक्ति का उपयोग सदैव धर्म और दूसरों की रक्षा के लिए करें।

श्री राम चालीसा और रामचरितमानस में अंतर

श्री राम चालीसा रामचरितमानस
40 चौपाइयों की स्तुति श्रीराम के जीवन का विस्तृत महाकाव्य
संक्षिप्त और सरल सात कांडों में विस्तृत वर्णन
दैनिक पाठ के लिए लोकप्रिय अध्ययन और पारायण के लिए प्रसिद्ध
भक्ति और गुणगान पर केंद्रित कथा, दर्शन और नीति का व्यापक ग्रंथ

रोचक तथ्य:

  • “चालीसा” शब्द का अर्थ है 40 चौपाइयों वाली रचना
  • श्री राम चालीसा का पाठ उत्तर भारत के अनेक मंदिरों और घरों में नियमित रूप से किया जाता है।
  • कई श्रद्धालु पहले हनुमान चालीसा और फिर श्री राम चालीसा का पाठ करते हैं, क्योंकि हनुमान जी को श्रीराम का परम भक्त माना जाता है।
  • राम नवमी और दीपावली पर इसका विशेष महत्व माना जाता है।

प्रेरणादायक संदेश

“श्री राम चालीसा केवल भगवान की स्तुति नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा है। यह हमें सत्य, मर्यादा, सेवा, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देती है।”

🙏 ॥ श्री सीतारामचन्द्रार्पणमस्तु ॥
🚩 ॥ जय श्री राम ॥
🌺 ॥ सियावर रामचन्द्र की जय ॥

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