Achyutam Keshavam Krishna Damodaram

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अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं – भजन (Achyutam Keshavam Krishna Damodaram)

“अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम्” भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करने वाला अत्यंत लोकप्रिय कृष्ण भजन है। इसमें भगवान के विभिन्न दिव्य नामों—अच्युत, केशव, कृष्ण, दामोदर, माधव, गोविंद आदि—का स्मरण किया जाता है।

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, शरणागति, भक्ति और विश्वास को व्यक्त करता है। कृष्ण भक्तों के लिए यह भजन विशेष रूप से प्रातःकालीन पूजा, संध्या भजन, जन्माष्टमी, एकादशी और कृष्ण आराधना के अवसर पर गाया जाता है।

॥ भजन ॥

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी ।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

🙏 जय श्री कृष्ण! 🦚 राधे राधे!

 

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📖 हिंदी भावार्थ

“अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम्”

भक्त भगवान के अनेक नामों का स्मरण कर रहा है। वह कहता है कि हे अच्युत, हे केशव, हे कृष्ण, हे दामोदर! मैं आपके दिव्य स्वरूप को प्रणाम करता हूँ।

“राम नारायणं जानकी वल्लभम्”

यहाँ भगवान के विभिन्न दिव्य स्वरूपों का स्मरण किया गया है। भक्त भगवान को नारायण और जानकी के प्रिय श्रीराम के रूप में भी नमन करता है।

इससे भाव प्रकट होता है कि भक्त के लिए परमात्मा के विभिन्न नाम और स्वरूप अंततः उसी एक दिव्य सत्ता की ओर ले जाते हैं।

“कौन कहता है भगवान आते नहीं”

भक्त पूछता है—कौन कहता है कि भगवान अपने भक्तों के पास नहीं आते?

“तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं”

जिस प्रकार मीरा ने श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रेम और समर्पण से पुकारा, उसी प्रकार यदि भक्त भी सच्चे हृदय से भगवान को पुकारे तो उसके भीतर ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव जाग सकता है।

“कौन कहता है भगवान खाते नहीं”

भगवान को प्रेम से अर्पित किया गया भोजन भक्ति का माध्यम बन जाता है।

“बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं”

रामायण की प्रसिद्ध शबरी कथा में भगवान राम द्वारा प्रेमपूर्वक अर्पित बेर स्वीकार करने का प्रसंग भक्तिभाव के महत्व को दर्शाता है।

यहाँ संदेश है कि भगवान वस्तु की कीमत नहीं, भक्त के प्रेम को देखते हैं।

“कौन कहता है भगवान सोते नहीं”

भगवान के बाल स्वरूप की कल्पना करते हुए भक्त उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह देखता है।

“माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं”

माता यशोदा और बाल कृष्ण का वात्सल्य भाव भक्ति की सबसे सुंदर भावनाओं में से एक है। भक्त भगवान को अपने बालक की तरह प्रेम करना चाहता है।

“कौन कहता है भगवान नाचते नहीं”

कृष्ण की वृंदावन लीलाओं में आनंद और नृत्य का भाव प्रमुख है।

“गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं”

यह पंक्ति भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाती है। कृष्ण की भक्ति में भक्त अपने अहंकार को छोड़कर भगवान की इच्छा के अनुसार चलने की भावना रखता है।

🌸 मुख्य संदेश

इस पूरे भजन का मूल भाव है—

भगवान को पाने के लिए केवल बड़े-बड़े कर्मकांड आवश्यक नहीं; सच्चा प्रेम, श्रद्धा और निष्कपट पुकार ही भक्ति का आधार है।


📖 पौराणिक कथा

🌿 शबरी और भगवान राम

रामायण की भक्तिपरंपरा में शबरी भगवान राम की अनन्य भक्त के रूप में प्रसिद्ध हैं। शबरी ने लंबे समय तक भगवान राम की प्रतीक्षा की। जब राम उनके आश्रम में पहुँचे, तो उन्होंने अत्यंत प्रेम से फल अर्पित किए। यह कथा भक्ति की उस भावना को दर्शाती है जिसमें भगवान के लिए वस्तु की बाहरी कीमत नहीं, बल्कि भक्त की श्रद्धा और प्रेम महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसीलिए भजन में शबरी का उदाहरण दिया गया है।


🪢 यशोदा और दामोदर

बाल कृष्ण की शरारतों से परेशान होकर माता यशोदा ने उन्हें बाँधने का प्रयास किया। कृष्ण को रस्सी से बाँधने के कारण उनका नाम दामोदर प्रसिद्ध हुआ। यह प्रसंग भगवान और भक्त के बीच वात्सल्य प्रेम का सुंदर प्रतीक है।

अनंत और सर्वशक्तिमान भगवान भी माता के प्रेम के सामने बालक बन जाते हैं—यही कृष्ण भक्ति का अद्भुत माधुर्य है।


🎵 मीरा और कृष्ण

संत मीरा ने श्रीकृष्ण को अपना आराध्य और प्रियतम मानकर जीवनभर उनकी भक्ति की। उनकी भक्ति में सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण दिखाई देता है।

भजन में मीरा का उदाहरण इसी अनन्य प्रेम और पुकार का प्रतीक है।


🪔 पूजा विधि

सरल कृष्ण पूजा विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को साफ करें।
  3. श्रीकृष्ण या बाल गोपाल की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
  4. दीपक और धूप जलाएँ।
  5. भगवान को चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  6. तुलसी दल अर्पित करें।
  7. माखन-मिश्री, फल या सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।
  8. “ॐ कृष्णाय नमः” का जाप करें।
  9. “अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम्” भजन गाएँ।
  10. अंत में आरती करें।
  11. भगवान को प्रणाम करके प्रसाद ग्रहण करें।

🙏 पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, शुद्ध भाव और सात्त्विकता है।


🥥 पूजा सामग्री

  • 🦚 श्रीकृष्ण/बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र
  • 🪔 दीपक
  • 🌿 तुलसी दल
  • 🌸 पुष्प
  • 🪷 चंदन
  • 🌾 अक्षत
  • 🔔 घंटी
  • धूप/अगरबत्ती
  • 🥛 दूध
  • 🧈 माखन
  • 🍬 मिश्री
  • 🍌 फल
  • 🍯 पंचामृत
  • नैवेद्य
  • आरती की थाली

🕉️ श्रीकृष्ण मंत्र

सरल कृष्ण मंत्र

ॐ कृष्णाय नमः॥

गोविंद मंत्र

ॐ गोविंदाय नमः॥

दामोदर मंत्र

ॐ दामोदराय नमः॥

कृष्ण महामंत्र

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे॥

भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार इनमें से किसी मंत्र का जाप कर सकता है।


🌟 भजन का महत्व

“अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम्” भजन का महत्व इसके नाम-स्मरण और प्रेम-भक्ति में है। भगवान के नामों का स्मरण मन को एकाग्र करने और पूजा के भाव को गहरा करने में सहायक हो सकता है।

इस भजन में:

  • 🦚 कृष्ण के दिव्य नामों का स्मरण
  • 💛 मीरा की प्रेम भक्ति
  • 🌿 शबरी की सरल भक्ति
  • 🪢 यशोदा का वात्सल्य
  • 🎵 वृंदावन की कृष्ण लीला
  • 🙏 भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण

जैसे भाव एक साथ दिखाई देते हैं।


🙏 भजन सुनने और गाने के लाभ

भक्ति की दृष्टि से इस भजन का गायन या श्रवण:

  • मन में शांति और सकारात्मकता का भाव ला सकता है।
  • श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
  • ध्यान और नाम-स्मरण के लिए वातावरण तैयार करता है।
  • परिवार में भक्तिपूर्ण वातावरण बनाता है।
  • भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को गहरा करता है।
  • कृष्ण की लीलाओं और भक्त परंपरा को समझने की प्रेरणा देता है।

इन लाभों को आध्यात्मिक/भावनात्मक लाभ के रूप में समझना चाहिए, न कि निश्चित सांसारिक परिणामों की गारंटी के रूप में।


⏰ पूजा और भजन का सही समय

इस भजन के लिए कोई एक अनिवार्य समय नहीं है।

🌅 प्रातःकाल

सुबह पूजा और ध्यान के समय गाना बहुत अच्छा माना जाता है।

🌆 संध्याकाल

दीपक जलाकर परिवार के साथ भजन किया जा सकता है।

🌙 जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष रूप से कृष्ण जन्म और रात्रि पूजा के समय गाया जा सकता है।

🪔 एकादशी

कृष्ण भक्त एकादशी के दिन भी नाम-स्मरण और भजन-कीर्तन करते हैं।

🌸 दैनिक पूजा

बाल गोपाल की दैनिक सेवा, श्रृंगार या भोग के समय भी इसका गायन किया जा सकता है।


💫 प्रेरणादायक संदेश

भगवान को पाने के लिए उन्हें केवल मंदिर में खोजने की आवश्यकता नहीं है।

जब भक्त सच्चे मन से उन्हें पुकारता है, प्रेम से भोग लगाता है, नाम का स्मरण करता है और अपने अहंकार को उनके चरणों में अर्पित करता है, तब उसका हृदय ही भगवान का मंदिर बन सकता है। मीरा हमें प्रेम सिखाती हैं, शबरी निष्कपट भक्ति सिखाती हैं और यशोदा वात्सल्य का भाव सिखाती हैं।

इसलिए जीवन में भक्ति का सबसे सरल मार्ग है— नाम जपें, प्रेम करें, सेवा करें और अपना मन भगवान को समर्पित करें। 🦚🙏


❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. “अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम्” किस भगवान का भजन है?

यह मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति और नाम-स्मरण से संबंधित लोकप्रिय भजन है।

2. “अच्युत” नाम का क्या अर्थ है?

अच्युत का अर्थ है—जो अपने दिव्य स्वरूप से कभी पतित नहीं होता।

3. कृष्ण को दामोदर क्यों कहा जाता है?

बाल लीला में माता यशोदा द्वारा कृष्ण को रस्सी से बाँधने के प्रसंग के कारण उनका नाम दामोदर प्रसिद्ध हुआ।

4. भजन में मीरा का उल्लेख क्यों है?

मीरा की कृष्ण भक्ति अनन्य प्रेम और पूर्ण समर्पण का उदाहरण मानी जाती है।

5. भजन में शबरी का उल्लेख क्यों किया गया है?

शबरी की कथा भक्तिभाव की सरलता और प्रेम से अर्पित वस्तु के महत्व को दर्शाती है।

6. क्या यह भजन रोज गाया जा सकता है?

हाँ। इसे दैनिक कृष्ण पूजा, सुबह या शाम के भजन-कीर्तन में गाया जा सकता है।

7. इस भजन के साथ कौन-सा मंत्र जपना चाहिए?

“ॐ कृष्णाय नमः”, “ॐ गोविंदाय नमः” या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप किया जा सकता है।

8. कृष्ण को भोग में क्या अर्पित करें?

माखन-मिश्री, दूध, फल, मिठाई और अन्य सात्त्विक नैवेद्य श्रद्धा से अर्पित किए जा सकते हैं।

9. क्या जन्माष्टमी पर यह भजन गा सकते हैं?

हाँ। जन्माष्टमी पर कृष्ण जन्मोत्सव, पूजा और भजन-कीर्तन में इसे गाया जा सकता है।

10. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

मुख्य संदेश है कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा, प्रेम और निष्कपट पुकार भक्ति का महत्वपूर्ण आधार है।


📣 जयघोष

भजन या पूजा के अंत में श्रद्धापूर्वक बोलें—

🦚 बोलो श्री कृष्ण भगवान की जय!
🙏 अच्युत भगवान की जय!
🌸 नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!
🪔 यशोदा मैया की जय!
🦚 लड्डू गोपाल की जय!
🌺 श्री राधा रानी की जय!
💛 बांके बिहारी लाल की जय!
🌿 वृंदावन धाम की जय!
📿 भक्त मीरा की जय!
🙏 जय श्री कृष्ण! राधे-राधे!

 

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