Aarti Bal Krishna Ki Keejen

Aarti Bal Krishna Ki Keejen
आरती बाल कृष्ण की कीजै

आरती बाल कृष्ण की कीजै (Aarti Bal Krishna Ki Keejen)

बाल कृष्ण भगवान श्रीकृष्ण का बालरूप है, जो वात्सल्य, प्रेम, निष्कपटता और दिव्य आनंद का प्रतीक माना जाता है। नंदलाल, लड्डू गोपाल, कान्हा, माखनचोर और यशोदानंदन के रूप में पूजित बाल कृष्ण अपनी बाल लीलाओं से भक्तों का हृदय मोह लेते हैं। उनकी आराधना से घर में सुख, समृद्धि, प्रेम और आनंद का वास होता है।

आरती के मूल रचयिता ब्रज संत पंडित गयाप्रसाद जी महाराज हैं, जिनकी समाधी गोवर्धन में स्थित है। (क्षेत्रानुसार आरती के पदों में कुछ भिन्नताएँ मिलती हैं)

॥ आरती – प्रथम पाठ कथन ॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै,
अपना जन्म सफल कर लीजै ॥

श्री यशोदा का परम दुलारा,
बाबा के अँखियन का तारा ।
गोपियन के प्राणन से प्यारा,
इन पर प्राण न्योछावर कीजै ॥
॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

बलदाऊ के छोटे भैया,
कनुआ कहि कहि बोले मैया ।
परम मुदित मन लेत बलैया,
अपना सरबस इनको दीजै ॥
॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

श्री राधावर कृष्ण कन्हैया,
ब्रज जन को नवनीत खवैया ।
देखत ही मन लेत चुरैया,
यह छवि नैनन में भरि लीजै ॥
॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

तोतली बोलन मधुर सुहावै,
सखन संग खेलत सुख पावै ।
सोई सुक्ति जो इनको ध्यावे,
अब इनको अपना करि लीजै ॥
॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै,
अपना जन्म सफल कर लीजै ॥

– पंडित गयाप्रसाद जी महाराज

🙏 जय श्री कृष्ण! 🦚 राधे राधे!

॥ आरती – द्वितीय पाठ कथन ॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै।
अपने जन के संकट हरि लीजै॥

बाल रूप जसुमति को प्यारा।
कन्हैया कहलाए जग सारा॥

माखन मिश्री दूध मलाई।
खात खेलत ग्वालन भाई॥

मोर मुकुट सिर सुंदर सोहे।
कुंडल श्रवण मनोहर मोहे॥

पीताम्बर तन शोभा भारी।
गले वैजयंती माला प्यारी॥

नंद यशोदा के प्राण अधारा।
भक्त जनों के कष्ट निवारा॥

आरती बाल कृष्ण की कीजै।
अपने जन के संकट हरि लीजै॥

🙏 जय श्री कृष्ण! 🦚 राधे राधे!

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🌸 आरती बाल कृष्ण की — हिंदी भावार्थ

**आरती बाल कृष्ण की कीजै,

अपना जन्म सफल कर लीजै ॥**

भावार्थ:
हे भक्त! प्रेम और श्रद्धा से बाल कृष्ण की आरती करो। उनके चरणों में भक्ति करके अपने मनुष्य जीवन को सफल और सार्थक बनाओ।


**श्री यशोदा का परम दुलारा,

बाबा के अँखियन का तारा ।
गोपियन के प्राणन से प्यारा,
इन पर प्राण न्योछावर कीजै ॥**

भावार्थ:
बाल कृष्ण माता यशोदा के अत्यंत प्रिय पुत्र हैं और नंद बाबा की आँखों के तारे हैं। वे ब्रज की गोपियों को भी अपने प्राणों से अधिक प्यारे हैं। ऐसे प्यारे बाल कृष्ण पर अपना तन-मन-जीवन प्रेमपूर्वक अर्पित कर देना चाहिए।

सरल भाव:
कृष्ण केवल यशोदा और नंद के ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रज के हृदय के प्रिय हैं।


**बलदाऊ के छोटे भैया,

कनुआ कहि कहि बोले मैया ।
परम मुदित मन लेत बलैया,
अपना सरबस इनको दीजै ॥**

भावार्थ:
बाल कृष्ण, बलराम जी के छोटे भाई हैं। माता यशोदा उन्हें बड़े प्रेम से ‘कनुआ’ (कन्हैया) कहकर पुकारती हैं। उन्हें देखकर माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं और प्रेम से उनकी बलैयाँ लेती हैं। ऐसे प्यारे कृष्ण को अपना सब कुछ—अपना मन, प्रेम और जीवन—समर्पित कर देना चाहिए।

‘बलैया लेना’ का अर्थ है प्रेमपूर्वक बच्चे की आरती उतारना और उसकी बुरी नजर से रक्षा की कामना करना।


**श्री राधावर कृष्ण कन्हैया,

ब्रज जन को नवनीत खवैया ।
देखत ही मन लेत चुरैया,
यह छवि नैनन में भरि लीजै ॥**

भावार्थ:
श्री राधा के प्रिय कृष्ण कन्हैया ब्रजवासियों को नवनीत अर्थात मक्खन खिलाने वाले और स्वयं भी मक्खन चुराकर खाने वाले हैं। उनका मनमोहक बाल रूप ऐसा है कि उन्हें देखते ही वे भक्तों का मन चुरा लेते हैं। इसलिए उनके सुंदर रूप को अपने नेत्रों और हृदय में सदा के लिए बसा लेना चाहिए।

सरल भाव:
कृष्ण का बाल रूप इतना आकर्षक और मनोहर है कि दर्शन मात्र से मन कृष्णमय हो जाता है।


**तोतली बोलन मधुर सुहावै,

सखन संग खेलत सुख पावै ।
सोई सुक्ति जो इनको ध्यावे,
अब इनको अपना करि लीजै ॥**

भावार्थ:
बाल कृष्ण की तोतली और मधुर वाणी अत्यंत मनोहर लगती है। वे अपने सखाओं के साथ खेलकर आनंद प्राप्त करते हैं। जो व्यक्ति ऐसे बाल कृष्ण का प्रेमपूर्वक ध्यान करता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। इसलिए हे प्रभु! अब कृष्ण को अपना बना लो और अपने हृदय में उनका निवास कराओ।

‘सोई सुक्ति’ का भाव है—वह व्यक्ति धन्य/सौभाग्यशाली है जो बाल कृष्ण का ध्यान और स्मरण करता है।


**आरती बाल कृष्ण की कीजै,

अपना जन्म सफल कर लीजै ॥**

भावार्थ:
बाल कृष्ण की प्रेमपूर्वक आरती और भक्ति करते हुए अपने मनुष्य जन्म को सफल बना लो। संसार की नश्वर वस्तुओं के बजाय भगवान के प्रेम को अपने जीवन का आधार बनाओ।

🙏 पूरी आरती का सार

इस आरती में बाल कृष्ण के वात्सल्य और माधुर्य रूप का सुंदर चित्रण है। भक्त कृष्ण को कभी यशोदा के लाड़ले, कभी नंद बाबा के आँखों के तारे, कभी गोपियों के प्रिय, कभी माखन चोर, तो कभी सखाओं के साथ खेलने वाले नटखट बालक के रूप में देखता है।

मुख्य संदेश है:

बाल कृष्ण के सुंदर रूप का दर्शन, उनके नाम का स्मरण और उनके प्रति निष्काम प्रेम ही जीवन को सार्थक और धन्य बनाने का मार्ग है।


भावार्थ:

आरती बाल कृष्ण की कीजै।

हे भक्तों! बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।

अपने जन के संकट हरि लीजै।

हे प्रभु! अपने भक्तों के सभी संकट और दुख दूर कर दीजिए।

बाल रूप जसुमति को प्यारा।

आपका बाल स्वरूप माता यशोदा को अत्यंत प्रिय है।

कन्हैया कहलाए जग सारा।

संपूर्ण संसार आपको प्रेम से कन्हैया कहकर पुकारता है।

माखन मिश्री दूध मलाई।

आपको माखन, मिश्री, दूध और मलाई अत्यंत प्रिय हैं।

खात खेलत ग्वालन भाई।

आप ग्वालबालों और गोपियों के साथ आनंदपूर्वक खेलते हैं।

मोर मुकुट सिर सुंदर सोहे।

आपके सिर पर सुशोभित मोरपंख का मुकुट अत्यंत सुंदर लगता है।

कुंडल श्रवण मनोहर मोहे।

आपके कानों में धारण किए हुए कुंडल मन को मोह लेते हैं।

पीताम्बर तन शोभा भारी।

पीले वस्त्र आपकी दिव्य शोभा को और बढ़ाते हैं।

गले वैजयंती माला प्यारी।

गले की वैजयंती माला अत्यंत सुंदर दिखाई देती है।

नंद यशोदा के प्राण अधारा।

आप नंद बाबा और माता यशोदा के जीवन का आधार हैं।

भक्त जनों के कष्ट निवारा।

आप अपने भक्तों के सभी दुखों और कष्टों का निवारण करते हैं।


📖 पौराणिक कथा

द्वापर युग में भगवान विष्णु ने पृथ्वी को अत्याचारी कंस से मुक्त कराने हेतु श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। गोकुल और वृंदावन में बाल्यकाल के दौरान उन्होंने पूतना, तृणावर्त, बकासुर और अघासुर जैसे राक्षसों का संहार किया। साथ ही माखन चोरी, गोपियों के साथ लीलाएँ और यशोदा मैया के साथ वात्सल्यपूर्ण प्रसंगों ने उन्हें “बाल गोपाल” के रूप में प्रसिद्ध किया। इन्हीं बाल लीलाओं की स्मृति में बाल कृष्ण की आरती गाई जाती है।


🪔 पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. पंचामृत से अभिषेक करें।
  4. पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
  5. माखन-मिश्री का भोग लगाएँ।
  6. दीप और धूप जलाएँ।
  7. आरती का गान करें।
  8. अंत में प्रसाद वितरित करें।

🧺 पूजा सामग्री

  • बाल गोपाल की प्रतिमा
  • पंचामृत
  • तुलसी दल
  • पीले पुष्प
  • दीपक
  • धूप/अगरबत्ती
  • माखन-मिश्री
  • फल
  • आरती थाली
  • घंटी

📿 भगवान श्रीकृष्ण के लोकप्रिय मंत्र

🙏 बाल कृष्ण मंत्र

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

🌸 बीज मंत्र

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः॥

🪷 श्रीकृष्ण मंत्र

ॐ कृष्णाय नमः॥

🦚 गोविंद मंत्र

ॐ गोविंदाय नमः॥

🌸 गोपाल मंत्र

ॐ गोपालाय नमः॥

🙏 वासुदेव मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

🎵 हरे कृष्ण महामंत्र

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥


🌺 महत्व

  • बाल कृष्ण की आरती वात्सल्य भक्ति का प्रतीक है।
  • यह भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संबंध को मजबूत करती है।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद का संचार करती है।
  • बच्चों के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य हेतु विशेष रूप से की जाती है।

🌿 लाभ

  • परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
  • संतान की रक्षा और उन्नति होती है।
  • मानसिक तनाव दूर होता है।
  • घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है।

⏰ पूजा का सही समय

  • प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल
  • बुधवार और गुरुवार विशेष शुभ
  • जन्माष्टमी पर विशेष फलदायी
  • बाल गोपाल के शृंगार एवं भोग के समय

💫 प्रेरणादायक संदेश

बाल कृष्ण हमें सिखाते हैं कि निष्कपट प्रेम, सरलता, आनंद और ईश्वर पर अटूट विश्वास जीवन को सुखमय बनाते हैं। जिस हृदय में बाल गोपाल के प्रति प्रेम होता है, वहाँ सदैव आनंद और कृपा का निवास रहता है।


❓ FAQ

1. बाल कृष्ण की आरती कब करनी चाहिए?

प्रातः और सायंकाल दोनों समय की जा सकती है।

2. बाल कृष्ण को कौन सा भोग प्रिय है?

माखन, मिश्री, दूध, दही और मलाई।

3. क्या बिना मूर्ति के आरती कर सकते हैं?

हाँ, चित्र के सामने भी आरती की जा सकती है।

4. बाल कृष्ण पूजा का मुख्य लाभ क्या है?

संतान सुख, पारिवारिक सुख और मानसिक शांति।

5. जन्माष्टमी पर यह आरती क्यों गाई जाती है?

क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की महिमा का वर्णन करती है।

6. क्या तुलसी दल अर्पित करना आवश्यक है?

हाँ, श्रीकृष्ण पूजा में तुलसी अत्यंत प्रिय मानी जाती है।

7. क्या बच्चे भी यह आरती कर सकते हैं?

हाँ, बाल कृष्ण की आराधना बच्चों के लिए विशेष शुभ मानी जाती है।

8. क्या प्रतिदिन माखन-मिश्री का भोग लगाना चाहिए?

यदि संभव हो तो अवश्य, अन्यथा श्रद्धानुसार कोई भी सात्विक भोग अर्पित कर सकते हैं।

9. बाल गोपाल की पूजा से क्या फल मिलता है?

सुख, शांति, समृद्धि और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

10. क्या यह आरती संतान प्राप्ति के लिए भी की जाती है?

हाँ, श्रद्धा और भक्ति से करने पर संतान सुख की कामना की जाती है।


📣 जयघोष

🦚 नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!
🦚 लड्डू गोपाल भगवान की जय!
🦚 यशोदा नंदन कृष्ण कन्हैया की जय!
🦚 राधे-कृष्ण भगवान की जय!

🙏 जय श्री राधे कृष्ण! जय लड्डू गोपाल! 🦚✨

आरती कुंजबिहारी की |  लल्ला की सुन के मै आयी: बधाई भजन | आरती: ॐ जय जगदीश हरे | मधुराष्टकम्: अधरं मधुरं वदनं मधुरं | छोटी छोटी गैया छोटे छोटे ग्वाल – कृष्ण भजन | नन्द के आनंद भयो – जन्माष्टमी भजन |  श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी – भजन | आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन – भोग आरती | श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं | श्री कृष्ण चालीसा | अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं – भजन | श्री सत्यनारायण जी कथा | श्री राम लला की आरती | रघुवर श्री रामचन्द्र जी की आरती

 

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