Shri Shiv Tandva Stotram
श्री शिवताण्डवस्तोत्रम् (Shri Shiv Tandva Stotram) श्री शिवताण्डवस्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली एवं दिव्य संस्कृत स्तोत्र है। इसकी रचना लंकेश्वर रावण द्वारा की गई मानी जाती है। पौराणिक […]
श्री शिवताण्डवस्तोत्रम् (Shri Shiv Tandva Stotram) श्री शिवताण्डवस्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली एवं दिव्य संस्कृत स्तोत्र है। इसकी रचना लंकेश्वर रावण द्वारा की गई मानी जाती है। पौराणिक […]
श्री रुद्राष्टकम् (Shri Rudrashtakam) श्री रुद्राष्टकम् भगवान शिव की महिमा का अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसकी रचना महान संत एवं श्रीरामभक्त गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। यह स्तोत्र आठ श्लोकों (अष्टकम्) से […]
लिङ्गाष्टकम् (Lingashtakam Stotram) लिंगाष्टकम् भगवान शिव के पवित्र शिवलिंग की महिमा का वर्णन करने वाला अत्यंत लोकप्रिय संस्कृत स्तोत्र है। इसमें आठ श्लोक (अष्टक) हैं, इसलिए इसे लिंगाष्टकम् कहा जाता है। प्रत्येक श्लोक के अंत […]
शिव पंचाक्षर स्तोत्र मंत्र (Shiv Panchakshar Stotram Mantra) शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने वाला एक अत्यंत प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है। परंपरागत रूप से इसकी रचना आदि शंकराचार्य को समर्पित मानी […]
संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak) संकटमोचन हनुमानाष्टक, गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित भगवान हनुमान जी की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसमें आठ पद (अष्टक) हैं, जिनमें हनुमान जी की महिमा, उनकी शक्ति, भगवान श्रीराम […]
नाग स्तोत्रम् (Naag Sarpa Stotram) ब्रह्म लोके च ये सर्पाः शेषनागाः पुरोगमाः । नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे सदा ॥१॥ विष्णु लोके च ये सर्पाः वासुकि प्रमुखाश्चये । नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताः प्रसन्नाः सन्तु मे […]
अक्षय तृतीया पूजा मन्त्र (Akshaya Tritiya Puja Mantra) हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। हिन्दु मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया कोई भी जप-तप, […]
बृहस्पति स्तोत्रं – स्कन्दपुराणे (Brihaspati Stotra – Skand Puran) ॥ विनियोग मन्त्र ॥ ॐ अस्य श्रीबृहस्पति स्तोत्रस्य गृत्समद् ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, बृहस्पतिर्देवता, बृहस्पति प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: गुरुर्बृहस्पतिर्जीव: सुराचार्यो विदां वरः । वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः […]