हो दीनानाथ – छठ पूजा गीत (Chhat Puja: Ho Deenanath Chhath Puja Song)
“हो दीनानाथ” छठ महापर्व के दौरान गाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय लोकभक्ति गीत है। इसमें व्रती श्रद्धापूर्वक भगवान सूर्यदेव (दीनानाथ) और छठी मैया से सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य तथा परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। यह गीत विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। वे जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, प्रकाश और समृद्धि के स्रोत हैं। वेदों में उन्हें जगत की आत्मा कहा गया है।
छठी मैया को माता षष्ठी और सूर्यदेव की बहन के रूप में पूजा जाता है। वे संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।
॥छठ पूजा गीत॥
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ
आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार
आजू के दिनवा हो दीनानाथ
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष
अंखिया दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया
बालक दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
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📖 हिंदी भावार्थ (सार)
इस गीत में भक्त सूर्यदेव को “दीनानाथ” अर्थात् दीन-दुखियों के नाथ और रक्षक के रूप में पुकारता है। वह अपनी मनोकामनाएँ, परिवार का सुख, संतान की रक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता है। गीत में श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का भाव प्रमुख रूप से व्यक्त होता है।
📜 पौराणिक कथा
छठ पर्व की महिमा रामायण और महाभारत दोनों में वर्णित है।
- मान्यता है कि वनवास से लौटने के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता ने सूर्यदेव की उपासना की थी।
- महाभारत में द्रौपदी ने सूर्य उपासना द्वारा अपने परिवार के कल्याण की प्रार्थना की थी।
- सूर्यपुत्र कर्ण प्रतिदिन सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते थे।
इन्हीं परंपराओं से छठ पूजा का महत्व और अधिक बढ़ता है।
🪔 छठ पूजा विधि
- नहाय-खाय से व्रत प्रारम्भ करें।
- खरना के दिन निर्जला उपवास रखें।
- सायंकाल अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दें।
- रातभर भक्ति एवं छठ गीत गाएँ।
- प्रातःकाल उदयमान सूर्य को अर्घ्य दें।
- छठी मैया और सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त करें।
- प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
🌼 पूजा सामग्री
- बाँस का सूप और दौरा
- गन्ना
- नारियल
- केला
- सेब
- सिंघाड़ा
- ठेकुआ
- दीपक
- धूप
- दूध
- गंगाजल
- लाल वस्त्र
- फूल
📿 मंत्र
सूर्य मंत्र
ॐ घृणिः सूर्याय नमः॥
सूर्य बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
आदित्य मंत्र
ॐ आदित्याय नमः॥
🌟 महत्व
- सूर्य उपासना का सबसे महान लोकपर्व।
- प्रकृति, जल और सूर्य के प्रति कृतज्ञता का उत्सव।
- परिवार की सुख-समृद्धि की कामना।
- संतान कल्याण हेतु विशेष पूजन।
- आत्मसंयम और तपस्या का प्रतीक।
✨ लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- परिवार में सुख-शांति की वृद्धि।
- संतान की उन्नति और रक्षा की कामना।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
- आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता।
- आध्यात्मिक शुद्धि और भक्ति में वृद्धि।
⏰ पूजा का सही समय
- कार्तिक शुक्ल षष्ठी (मुख्य छठ)
- चैत्र शुक्ल षष्ठी (चैती छठ)
- सूर्यास्त के समय पहला अर्घ्य
- सूर्योदय के समय दूसरा अर्घ्य
🌷 प्रेरणादायक संदेश
“छठ पर्व हमें सिखाता है कि श्रद्धा, अनुशासन, तपस्या और प्रकृति के प्रति सम्मान जीवन को समृद्ध बनाते हैं। सूर्य की तरह स्वयं भी प्रकाश और सकारात्मकता फैलाएँ।”
❓ FAQ
1. हो दीनानाथ गीत किस अवसर पर गाया जाता है?
छठ पूजा के दौरान।
2. दीनानाथ किसे कहा गया है?
भगवान सूर्यदेव को।
3. छठ पूजा कितने दिनों का पर्व है?
मुख्य रूप से चार दिनों का।
4. छठी मैया कौन हैं?
माता षष्ठी, जिन्हें संतान रक्षा की देवी माना जाता है।
5. छठ में अर्घ्य किसे दिया जाता है?
अस्ताचलगामी और उदयमान सूर्य को।
6. छठ पूजा का मुख्य प्रसाद क्या है?
ठेकुआ।
7. क्या पुरुष भी छठ व्रत रख सकते हैं?
हाँ, पुरुष और महिलाएँ दोनों व्रत रख सकते हैं।
8. छठ पूजा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सूर्य उपासना और परिवार के कल्याण की कामना।
9. छठ पूजा कहाँ सबसे अधिक प्रसिद्ध है?
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में।
10. छठ पूजा में कौन-सा मंत्र सबसे अधिक बोला जाता है?
ॐ घृणिः सूर्याय नमः॥
📣 जयघोष
🌞 छठी मैया की जय!
🌞 सूर्य नारायण भगवान की जय!
🌞 दीनानाथ भगवान की जय!
🌞 ऊँ सूर्यदेव की जय!
🌞 छठ महापर्व की जय! 🙏🙏
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