हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन – भजन (Hey Dukh Bhanjan Maruti Nandan – Bhajan)
“हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन” भगवान श्रीहनुमान जी की महिमा का गुणगान करने वाला अत्यंत लोकप्रिय भक्ति भजन है। इस भजन में भक्त हनुमान जी को अपने दुःखों का नाश करने वाले, संकटों से रक्षा करने वाले और भगवान श्रीराम के परम भक्त के रूप में स्मरण करता है। भजन का मुख्य संदेश है कि सच्ची श्रद्धा से हनुमान जी का स्मरण करने पर भय, दुःख और बाधाएँ दूर होती हैं।
भगवान श्रीहनुमान को वायु पुत्र, अंजनीसुत, बजरंगबली, मारुती नंदन और संकटमोचन के नाम से जाना जाता है। वे भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं और शक्ति, भक्ति, बुद्धि, साहस तथा निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। रामायण के अनुसार हनुमान जी ने माता सीता की खोज, लंका दहन और संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाने जैसे अनेक दिव्य कार्य किए।
- यह भजन हनुमान भक्ति पर आधारित है।
- मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से गाया जाता है।
- हनुमान मंदिरों में भजन-कीर्तन के दौरान इसका गायन लोकप्रिय है।
- यह भजन श्रद्धा, साहस और भगवान राम के प्रति समर्पण का संदेश देता है।
॥ भजन ॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
अष्ट सिद्धि, नव निधि के दाता,
दुखिओं के तुम भाग्यविधाता ।
सियाराम के काज सवारे,
मेरा करो उद्धार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ।
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी,
तुम पर रीझे अवधबिहारी ।
भक्तिभाव से ध्याऊं तोहे,
कर दुखों से पार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ।
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
जपूँ निरंतर नाम तिहरा,
अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा ।
रामभक्त मोहे शरण मे लीजे,
भाव सागर से तार ॥
पवनसुत विनती बारम्बार ।
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन,
सुन लो मेरी पुकार ।
पवनसुत विनती बारम्बार ॥
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🕉️ हिंदी भावार्थ
इस भजन में भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन के दुःख, कष्ट और संकटों का निवारण करें। हनुमान जी को करुणामय, बलशाली और भक्तों की रक्षा करने वाला बताया गया है। भजन यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति और विश्वास से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
📜 पौराणिक कथा
रामायण में वर्णन मिलता है कि जब भगवान श्रीराम की पत्नी माता सीता का रावण ने हरण कर लिया, तब हनुमान जी ने समुद्र पार करके अशोक वाटिका में माता सीता का पता लगाया। उन्होंने लंका में अपने पराक्रम का प्रदर्शन किया और बाद में संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए। इन दिव्य कार्यों के कारण उन्हें संकटमोचन और दुःखभंजन कहा जाता है।
🪔 पूजा विधि
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
- सिंदूर, चमेली का तेल और लाल पुष्प अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा या सुंदरकाण्ड का पाठ करें।
- “हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन” भजन का श्रद्धापूर्वक गायन करें।
- आरती कर प्रसाद वितरित करें।
🌼 पूजा सामग्री
- हनुमान जी का चित्र या विग्रह
- दीपक
- घी या तेल
- सिंदूर
- चमेली का तेल
- लाल पुष्प
- गुड़ और चना
- तुलसी एवं प्रसाद
📿 मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ हनुमते नमः॥
संकटमोचन मंत्र
ॐ ऐं भ्रीम हनुमते श्रीरामदूताय नमः॥
हनुमान गायत्री मंत्र
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥
🌟 महत्व
- हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सरल माध्यम है।
- भय और नकारात्मकता को दूर करने में सहायक माना जाता है।
- रामभक्ति की भावना को मजबूत करता है।
- आत्मविश्वास और साहस बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
- भक्त को धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
✨ लाभ
- मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- आत्मबल और साहस में वृद्धि होती है।
- संकटों से लड़ने की शक्ति मिलती है।
- नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
- भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रति श्रद्धा बढ़ती है।
- जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
⏰ पूजा का सही समय
- मंगलवार
- शनिवार
- ब्रह्म मुहूर्त
- संध्या आरती का समय
- हनुमान जयंती
- किसी भी समय श्रद्धापूर्वक भजन किया जा सकता है।
🌷 प्रेरणादायक संदेश
हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति विनम्रता, सेवा और भक्ति में निहित है। यदि जीवन में कठिनाइयाँ आएँ तो भयभीत होने के बजाय साहस, विश्वास और ईश्वर-भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। हनुमान जी की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
❓ FAQ
1. “हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन” भजन किसकी स्तुति है?
यह भजन भगवान श्रीहनुमान जी की स्तुति में गाया जाता है।
2. मारुती नंदन का क्या अर्थ है?
मारुती नंदन का अर्थ है वायु देव के पुत्र श्रीहनुमान।
3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
हनुमान जी की भक्ति से दुःख और संकट दूर होते हैं।
4. इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?
मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से किया जा सकता है।
5. क्या इस भजन से मानसिक शांति मिलती है?
हाँ, श्रद्धा से भजन करने पर मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।
6. क्या भजन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, हनुमान चालीसा के साथ इसका गायन अत्यंत शुभ माना जाता है।
7. हनुमान जी को कौन सा प्रसाद प्रिय है?
गुड़, चना, बूंदी और बेसन के लड्डू प्रिय माने जाते हैं।
8. क्या महिलाएँ भी इस भजन का गायन कर सकती हैं?
हाँ, सभी भक्त श्रद्धापूर्वक इसका गायन कर सकते हैं।
9. हनुमान जी को संकटमोचन क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वे भक्तों के संकट और कष्टों का निवारण करते हैं।
10. क्या इस भजन का संबंध रामभक्ति से है?
हाँ, हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं, इसलिए यह भजन रामभक्ति से भी जुड़ा हुआ है।
📣 जयघोष
जय बजरंगबली!
जय श्री रामदूत हनुमान!
संकटमोचन हनुमान की जय!
पवनसुत हनुमान की जय!
बोलो वीर हनुमान की जय! 🙏🕉️🐘🌺
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