Shri Surya Dev – Jai Jai Ravidev

Shri Surya Dev - Jai Jai Ravidev
Shri Surya Dev - Jai Jai Ravidev

श्री सूर्य देव – जय जय रविदेव (Shri Surya Dev – Jai Jai Ravidev)

यह आरती भगवान सूर्य नारायण की महिमा का गुणगान करती है। इसमें सूर्यदेव को समस्त संसार के प्रकाशदाता, जीवनदाता, अज्ञान और अंधकार को दूर करने वाले तथा समस्त प्राणियों के कल्याणकारी देवता के रूप में नमन किया गया है। भगवान सूर्यदेव हिंदू धर्म में प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं। वे नवग्रहों के अधिपति हैं और उन्हें आदित्य, भास्कर, रवि, दिवाकर, मार्तण्ड और सूर्यनारायण जैसे नामों से जाना जाता है।

॥ आरती ॥

जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव ।
रजनीपति मदहारी,
शतलद जीवन दाता ॥

पटपद मन मदुकारी,
हे दिनमण दाता ।
जग के हे रविदेव,
जय जय जय स्वदेव ॥

नभ मंडल के वाणी,
ज्योति प्रकाशक देवा ।
निजजन हित सुखराशी,
तेरी हम सब सेवा ॥

करते हैं रविदेव,
जय जय जय रविदेव ।
कनक बदन मन मोहित,
रुचिर प्रभा प्यारी ॥

नित मंडल से मंडित,
अजर अमर छविधारी ।
हे सुरवर रविदेव,
जय जय जय रविदेव ॥

जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव ।
रजनीपति मदहारी,
शतलद जीवन दाता ॥

 

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📖 हिंदी भावार्थ (पंक्ति-दर-पंक्ति)

जय जय जय रविदेव,

भावार्थ:
हे सूर्यदेव! आपकी बार-बार जय हो, आप समस्त जगत के कल्याणकर्ता हैं।

जय जय जय रविदेव ।

भावार्थ:
हे रविदेव! हम आपकी महिमा का गुणगान करते हुए आपको बार-बार प्रणाम करते हैं।


रजनीपति मदहारी,

भावार्थ:
हे सूर्यदेव! आप रात्रि के स्वामी चन्द्रमा के प्रभाव को समाप्त कर अंधकार को दूर कर देते हैं।

शतलद जीवन दाता ॥

भावार्थ:
आप असंख्य प्राणियों और कमलों को जीवन प्रदान करने वाले हैं। आपके प्रकाश से समस्त सृष्टि जीवंत रहती है।


पटपद मन मदुकारी,

भावार्थ:
हे प्रभु! आपके दिव्य चरणों और स्वरूप का स्मरण भक्तों के मन को आनंद और मधुरता से भर देता है।

हे दिनमण दाता ।

भावार्थ:
हे दिन के रत्न स्वरूप सूर्यदेव! आप ही दिन का प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करते हैं।


जग के हे रविदेव,

भावार्थ:
हे सम्पूर्ण संसार के सूर्यदेव! आप समस्त जगत का पालन करने वाले हैं।

जय जय जय स्वदेव ॥

भावार्थ:
हे देवों में श्रेष्ठ देव! आपकी बार-बार जय हो।


नभ मंडल के वाणी,

भावार्थ:
हे आकाश मंडल में प्रकाशमान प्रभु! आपका तेज सम्पूर्ण आकाश को आलोकित करता है।

ज्योति प्रकाशक देवा ।

भावार्थ:
आप ही समस्त प्रकाश और ऊर्जा के स्रोत हैं तथा संसार को प्रकाश प्रदान करते हैं।


निजजन हित सुखराशी,

भावार्थ:
आप अपने भक्तों पर कृपा करके उन्हें सुख, शांति और कल्याण प्रदान करते हैं।

तेरी हम सब सेवा ॥

भावार्थ:
हम सभी भक्त श्रद्धा और भक्ति से आपकी सेवा और आराधना करते हैं।


करते हैं रविदेव,

भावार्थ:
हे सूर्यदेव! हम आपकी उपासना और स्तुति करते हैं।

जय जय जय रविदेव ।

भावार्थ:
आपकी बार-बार जय हो।


कनक बदन मन मोहित,

भावार्थ:
आपका स्वर्ण के समान चमकता हुआ तेजस्वी स्वरूप भक्तों के मन को मोहित कर लेता है।

रुचिर प्रभा प्यारी ॥

भावार्थ:
आपकी सुंदर और मनोहर किरणें अत्यंत प्रिय और सुखद हैं।


नित मंडल से मंडित,

भावार्थ:
आप सदैव अपने तेजस्वी प्रकाश मंडल से सुशोभित रहते हैं।

अजर अमर छविधारी ।

भावार्थ:
आपका दिव्य स्वरूप शाश्वत, अविनाशी और अमर है।


हे सुरवर रविदेव,

भावार्थ:
हे देवताओं में श्रेष्ठ सूर्यदेव! हम आपको प्रणाम करते हैं।

जय जय जय रविदेव ॥

भावार्थ:
आपकी बार-बार जय हो।


जय जय जय रविदेव,

भावार्थ:
हे सूर्य भगवान! आपकी निरंतर जय हो।

जय जय जय रविदेव ।

भावार्थ:
हम श्रद्धापूर्वक आपकी स्तुति और वंदना करते हैं।


रजनीपति मदहारी,

भावार्थ:
आप अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाले हैं।

शतलद जीवन दाता ॥

भावार्थ:
आप सम्पूर्ण संसार को जीवन, ऊर्जा और चेतना प्रदान करने वाले हैं।


🌞 आरती का सार

इस आरती में सूर्यदेव को:

  • जगत का प्रकाशदाता
  • अंधकार का नाश करने वाला
  • जीवन और ऊर्जा का स्रोत
  • भक्तों को सुख और कल्याण देने वाला
  • तेज, शक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक

बताया गया है।


📜 पौराणिक कथा

पुराणों और रामायण में सूर्यदेव का विशेष महत्व बताया गया है। आदित्य हृदय स्तोत्र में महर्षि अगस्त्य ने भगवान श्रीराम को सूर्य उपासना का उपदेश दिया था, जिसके बाद श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की। सूर्यदेव को नवग्रहों का राजा भी माना जाता है।


🪔 पूजा विधि

  1. प्रातः सूर्योदय से पहले स्नान करें।
  2. पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
  3. तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।
  4. लाल पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
  5. सूर्य मंत्र का जाप करें।
  6. “जय जय रविदेव” आरती या सूर्य स्तुति का पाठ करें।
  7. स्वास्थ्य, तेज और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

🌼 पूजा सामग्री

  • तांबे का लोटा
  • स्वच्छ जल
  • लाल पुष्प
  • रोली
  • अक्षत
  • दीपक
  • धूप
  • गुड़
  • गेहूँ
  • लाल वस्त्र
  • सूर्यदेव का चित्र

📿 मंत्र

सूर्य बीज मंत्र

॥ ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ॥

सूर्य मंत्र

॥ ॐ घृणिः सूर्याय नमः ॥

आदित्य मंत्र

॥ ॐ आदित्याय नमः ॥


🌟 महत्व

  • सूर्य उपासना का सरल माध्यम।
  • आत्मबल और सकारात्मक सोच की प्रेरणा।
  • दैनिक प्रार्थना और आराधना में उपयोगी।
  • रविवार और सूर्य पर्वों पर विशेष रूप से गाई जाती है।

✨ लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
  • अनुशासन और नियमितता की भावना।
  • सूर्य उपासना से आध्यात्मिक जुड़ाव।
  • मानसिक उत्साह और प्रार्थना भाव में वृद्धि।

⏰ पूजा का सही समय

  • प्रतिदिन सूर्योदय के समय
  • रविवार
  • रथ सप्तमी
  • मकर संक्रांति
  • सूर्य षष्ठी

🌷 प्रेरणादायक संदेश

“सूर्य की तरह स्वयं भी प्रकाश फैलाइए। कठिन परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी बड़ी हों, निरंतर कर्म और आत्मविश्वास से सफलता प्राप्त की जा सकती है।”


❓ FAQ

1. जय जय रविदेव किस देवता की आरती है?

भगवान सूर्यदेव की।

2. इसका पाठ कब करना चाहिए?

प्रातःकाल सूर्योदय के समय।

3. सूर्यदेव को जल क्यों अर्पित किया जाता है?

सूर्य उपासना और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा के रूप में।

4. सूर्यदेव का प्रमुख मंत्र क्या है?

ॐ घृणिः सूर्याय नमः।

5. रविवार का सूर्यदेव से क्या संबंध है?

रविवार सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है।

6. क्या विद्यार्थी सूर्य उपासना कर सकते हैं?

हाँ, श्रद्धापूर्वक कोई भी कर सकता है।

7. सूर्यदेव का वाहन क्या है?

सात घोड़ों वाला रथ।

8. सूर्यदेव को नवग्रहों का राजा क्यों कहा जाता है?

ज्योतिष परंपरा में उन्हें नवग्रहों का प्रमुख माना जाता है।


📣 जयघोष

☀️ जय सूर्य नारायण भगवान की जय!
☀️ जय जय रविदेव की जय!
☀️ जय आदित्य देव की जय!
☀️ जय भास्कर भगवान की जय!
☀️ जय दिवाकर देव की जय! 🙏🙏

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