Shri Shiv Stuti – Shri Girjapati Vandikar

Shri Shiv Stuti - Shri Girjapati Vandikar
Shri Shiv Stuti - Shri Girjapati Vandikar

श्री शिव स्तुति – श्री गिरजापति वंदिकर (Shri Shiv Stuti – Shri Girjapati Vandikar)

श्री शिव स्तुति (श्री गिरजापति वंदिकर) एक अत्यंत मधुर एवं भक्तिभाव से परिपूर्ण शिव-स्तुति है, जिसकी रचना भक्त कवि अयोध्यादास जी द्वारा की गई मानी जाती है। इस स्तुति में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनके करुणामय स्वभाव, भक्तवत्सलता, वैराग्य, दयालुता तथा संसार के कल्याणकारी रूप का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है।

॥ दोहा ॥

श्री गिरजापति वंदिकर, चरण मध्य शिरणाय।
कहत अयोध्यादास तुम, मो पर होय सहाय॥

॥ स्तुति 

नन्दी की सवारी नाग अंगीकार धारी।
नित संत सुखकारी नीलकंठ त्रिपुरारी हैं।

गले मुंडमाला धारी सिर सोहे जटाधारी ।
वाम अंग में बिहारी गिरिराज सुतवारी हैं।

दानी बड़े भारी शेष शारदा पुकारी।
काशीपति मदनारी कर त्रिशूल चक्र धारी हैं।

कला उजियारी लख देव सो निहारी।
यश गावें वेदचारी सो हमारी रखवारी हैं॥ 1 ॥

शम्भु बैठे हैं विशाला भंग पीवे सो निराला ।
नित रहें मतवाला अहि अंग पै चढ़ाये हैं।

गल सोहे, मुण्डमाला, कर डमरू विशाला।
अरु ओढ़े मृगछाला भस्म अंग में लगाये हैं।

संग सुरभी सुतशाला करें भक्त प्रतिपाला।
मृत्यु हरें है अकाला शीश जटा को बढ़ायें हैं।

कहैं रामलाल मोहि करो तुम निहाला काटो ।
विपति कसाला जैसे काम को जलाये हैं॥ 2 ॥

मारा है जलंधर और त्रिपुर को संहारा जिन।
जारा है काम जाके शीश गंगधारा है।

धारा है अपार जासु महिमा है तीनों लोक ।
भाल में है इंदु जाके सुषमा की सारा है।

सारा है बात सब पायो हलाहल जिन।
भक्त के अधारा जाहि वेदन उचारा है।

चारा है भाग जाके द्वार हैं गिरीश कन्या |
कहत अयोध्या सोई मालिक हमारा है॥ 3 ॥

अष्ट गुरु ज्ञानी जाके मुख वेदबानी।
सौहे भवन भवानी सुख सम्पत्ति लहा करें।

मुण्डन की माला जाके चन्द्रमा ललाट सौहे।
दासन के दास, जाके दारिद्र दहा करें।

चारों द्वार द्वार बन्दी, जाके द्वारपाल नन्दी।
कहत कवि अनंदी, नर नाहक ह हा करें।

जगत रिसाय, यमराज को कहा बसाय।
शंकर सहाय, तो भयंकर कहा करे ॥ 4 ॥

सवैया-

गौर शरीर में गौर विराजत। मौर जटा सिर सोहत जाके।
नागन के उपवीत लसें सो। अयोध्या कहे शशि भाल में ताके॥
दान करै पल में फल चारि । और टारत अंक लिखे विधना के।
शंकर नाम निःशंक सदा हि । भरोसे रहैं निशिवासर ताके ॥ 5 ॥

॥ दोहा ॥

मंगसर मास हेमन्त ऋतु, षष्ठी तिथि शुभ बुद्ध।
कहत अयोध्यादास तुम, शिव के विनय समुद्ध ॥

इति श्री शिव स्तुति सम्पूर्णम्।

 

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🌸 स्तुति का भावार्थ

इस स्तुति में भगवान शिव के दिव्य एवं कल्याणकारी स्वरूप का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है।

मुख्य भाव—

  • भगवान शिव समस्त सृष्टि के पालन एवं संहार के अधिपति हैं।
  • वे अत्यंत सरल, दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं।
  • जो भक्त सच्चे मन से उनकी शरण ग्रहण करता है, उसकी रक्षा स्वयं महादेव करते हैं।
  • शिव सांसारिक मोह से मुक्त होकर आत्मज्ञान एवं मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।
  • उनके चरणों में समर्पण करने से भय, दुःख और मानसिक अशांति दूर होती है।

🕉️ पौराणिक कथा

यद्यपि यह स्तुति किसी विशेष पौराणिक कथा पर आधारित नहीं है, किन्तु इसमें भगवान शिव के अनेक प्रसिद्ध प्रसंगों का स्मरण होता है।

इनमें प्रमुख हैं—

समुद्र मंथन

समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा हेतु स्वयं ग्रहण किया और नीलकंठ कहलाए।

गंगा अवतरण

राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर पृथ्वी पर अवतरित किया।

कैलाशवासी योगेश्वर

भगवान शिव कैलाश पर्वत पर माता पार्वती एवं नंदी के साथ विराजमान रहते हैं और समस्त जीवों का कल्याण करते हैं।

भोलेनाथ

वे अत्यंत सरल स्वभाव के हैं तथा सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।


🪔 पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
  3. शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
  4. जल एवं गंगाजल से अभिषेक करें।
  5. दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर से पंचामृत अभिषेक कर सकते हैं।
  6. बिल्वपत्र, धतूरा, आक के पुष्प अर्पित करें।
  7. चंदन, अक्षत एवं पुष्प अर्पित करें।
  8. धूप-दीप जलाएँ।
  9. शिव मंत्र का जप करें।
  10. श्रद्धापूर्वक श्री शिव स्तुति का पाठ करें।
  11. अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण करें।

🌿 पूजा सामग्री

  • शिवलिंग या शिव प्रतिमा
  • गंगाजल
  • स्वच्छ जल
  • पंचामृत
  • बिल्वपत्र
  • धतूरा
  • आक के पुष्प
  • सफेद पुष्प
  • चंदन
  • अक्षत
  • धूप
  • दीपक
  • घी
  • रुई
  • कपूर
  • नैवेद्य
  • फल
  • प्रसाद

🕉️ प्रमुख मंत्र

पंचाक्षरी मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥


🌼 शिव स्तुति का महत्व

  • भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
  • मन में शांति और सकारात्मकता आती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
  • आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है।
  • भगवान के प्रति भक्ति दृढ़ होती है।
  • मोक्ष मार्ग की प्रेरणा मिलती है।

🌷 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लाभ

श्रद्धा और भक्ति से इस स्तुति का पाठ करने पर भक्तों का विश्वास है कि—

  • मानसिक तनाव कम होता है।
  • भय एवं चिंता दूर होती है।
  • परिवार में सुख-शांति आती है।
  • कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • शिव कृपा से जीवन में संतुलन आता है।
  • श्रद्धा एवं आत्मबल बढ़ता है।
  • आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

नोट: ये लाभ धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी निश्चित सांसारिक या चिकित्सीय परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।


⏰ पाठ का सही समय

  • 🌅 प्रातः ब्रह्म मुहूर्त
  • 🌄 सूर्योदय के बाद
  • 🌙 सायंकाल प्रदोष काल
  • 🕉️ प्रत्येक सोमवार
  • 🌿 श्रावण मास
  • 🔱 महाशिवरात्रि
  • 🐍 नाग पंचमी
  • 🌑 मासिक शिवरात्रि

🌟 प्रेरणादायक संदेश

“भगवान शिव हमें सिखाते हैं कि सच्ची शक्ति विनम्रता, करुणा और आत्मसंयम में निहित है। जो व्यक्ति अहंकार त्यागकर श्रद्धा, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलता है, उस पर महादेव की कृपा सदैव बनी रहती है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, यदि मन में ‘ॐ नमः शिवाय’ का विश्वास हो तो हर अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य आता है।”


❓FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. श्री शिव स्तुति (श्री गिरजापति वंदिकर) किसने लिखी है?

मान्यता के अनुसार इस स्तुति की रचना भक्त कवि अयोध्यादास जी ने की है।

2. इस स्तुति का पाठ कब करना चाहिए?

प्रतिदिन, सोमवार, प्रदोष व्रत, श्रावण मास, महाशिवरात्रि तथा नाग पंचमी पर इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

3. क्या बिना शिवलिंग के भी इसका पाठ किया जा सकता है?

हाँ, भगवान शिव का स्मरण करके किसी भी स्वच्छ स्थान पर श्रद्धापूर्वक इसका पाठ किया जा सकता है।

4. क्या महिलाएँ भी इस स्तुति का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, यह स्तुति सभी श्रद्धालुओं—पुरुष, महिलाएँ और बच्चे—सभी के लिए उपयुक्त है।

5. क्या इस स्तुति के साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करना चाहिए?

हाँ, स्तुति के पहले या बाद में पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप अत्यंत शुभ माना जाता है।

6. क्या श्रावण मास में इसका विशेष महत्व है?

हाँ, श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान स्तुति का नियमित पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

7. क्या इससे मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं?

शास्त्रीय मान्यता है कि श्रद्धा, सदाचार और निष्काम भक्ति के साथ भगवान शिव की उपासना करने से भक्त को मानसिक शांति, आत्मबल तथा शुभ फल की प्राप्ति होती है।

8. क्या इस स्तुति का पाठ परिवार के साथ किया जा सकता है?

हाँ, सामूहिक रूप से श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से घर का वातावरण अधिक आध्यात्मिक और शांतिमय बनता है।


🚩॥ जयघोष:

हर हर महादेव!🙏
ॐ नमः शिवाय!
🕉️🙏

 

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