Shri Kuber Aarti

Shri Kuber Aarti
भगवान कुबेर की आरती

भगवान श्री कुबेर आरती (Shri Kuber Aarti)

भगवान कुबेर को हिंदू धर्म में धन, संपदा, ऐश्वर्य और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें धनपति, यक्षराज और देवताओं के कोषाध्यक्ष जैसे नामों से भी जाना जाता है। भगवान कुबेर की उपासना केवल धन प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि धन के सदुपयोग, आर्थिक स्थिरता, उद्यम और समृद्ध जीवन की भावना से भी की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कुबेर भगवान शिव के परम भक्त हैं और उनकी नगरी अलकापुरी मानी जाती है।

भगवान कुबेर को यक्षों के राजा और धन के अधिपति के रूप में वर्णित किया गया है। पौराणिक ग्रंथों में उनका संबंध ऋषि विश्रवा से बताया गया है। वे रावण के सौतेले भाई माने जाते हैं। कुबेर भगवान को सामान्यतः समृद्ध आभूषणों से सुसज्जित, स्वर्णाभूषण धारण किए हुए और धन-सम्पदा से जुड़े प्रतीकों के साथ चित्रित किया जाता है। उनके हाथ में गदा, धन की पोटली या रत्नों से भरा पात्र दिखाया जाता है।

॥ प्रथम आरती ॥

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे ।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे ।
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे ।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे ।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने ।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

बल बुद्धि विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े ।
अपने भक्त जनों के,
सारे काम संवारे ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

मुकुट मणी की शोभा,
मोतियन हार गले,
स्वामी मोतियन हार गले ।
अगर कपूर की बाती,
घी की जोत जले ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

॥ द्वितीय आरती ॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भक्तों के,
भंडार सदा भरे॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…

रत्नों से भरे भंडार,
धन-धान्य अपार।
जो जन तेरी सेवा करे,
होय सदा सुखकार॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…

स्वर्ण सिंहासन शोभित,
मुकुट विराजे माथ।
हाथ गदा और वरमुद्रा,
रहती कृपा साथ॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…

अलकापुरी के स्वामी,
धनपति कहलाए।
देवों के कोषाध्यक्ष,
सबके काज बनाए॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…

शिव के प्रिय सेवक हो,
धर्म मार्ग दिखलाओ।
लोभ-मोह को दूर करो,
सद्बुद्धि हमें दिलाओ॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…

निर्धनता का नाश करो,
संकट दूर भगाओ।
मेहनत, सदाचार, सत्य से,
जीवन सफल बनाओ॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…

धन-धान्य और सुख-समृद्धि,
घर-आँगन में आए।
तेरी कृपा से भक्तों के,
सारे कष्ट मिट जाएँ॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भक्तों के,
भंडार सदा भरे॥

॥ तृतीय आरती ॥

जय कुबेर स्वामी,
प्रभु जय कुबेर स्वामी,
हे समरथ परिपूरन ।
हे समरथ परिपूरन ।
हे अन्तर्यामी ॥
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

जय कुबेर स्वामी,
प्रभु जय कुबेर स्वामी,
हे समरथ परिपूरन । -x2
हे अन्तर्यामी ।
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

विश्रवा के लाल इदविदा के प्यारे,
माँ इदविदा के प्यारे,
कावेरी के नाथ हो । -x2
शिवजी के दुलारे ।
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

मनिग्रवी मीनाक्षी देवी,
नलकुबेर के तात,
प्रभु नलकुबेर के तात
देवलोक में जागृत । -x2
आप ही हो साक्षात ।
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

रेवा नर्मदा तट
शोभा अतिभारी
प्रभु शोभा अतिभारी
करनाली में विराजत । -x2
भोले भंडारी ।
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

वंध्या पूत्र रतन और
निर्धन धन पाये
सब निर्धन धन पाये
मनवांछित फल देते । -x2
जो मन से ध्याये ।
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

सकल जगत में तुम ही
सब के सुखदाता
प्रभु सब के सुखदाता
दास जयंत कर वन्दे । -x2
जाये बलिहारी ।
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

जय कुबेर स्वामी,
प्रभु जय कुबेर स्वामी,
हे समरथ परिपूरन ।
हे समरथ परिपूरन ।
हे अन्तर्यामी ॥
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

नोट: ऊपर दिए गयें पाठ भगवान कुबेर आराधना के भाव पर आधारित सरल आरती-पाठ हैं। अलग-अलग परंपराओं और पुस्तकों में कुबेर आरती के शब्दों में भिन्नता मिल सकती है।

श्री कुबेर अष्टोत्तर शतनामावली – 108 नाम | आरती माँ लक्ष्मीजी | आरती श्री गणेश जी | आरती ॐ जय जगदीश हरे | श्री कुबेर चालीसा


🕉️ भगवान कुबेर की आरती का हिंदी भावार्थ

“ॐ जय यक्ष कुबेर हरे”
हे यक्षराज कुबेर! हम आपकी आरती करते हैं और आपकी स्तुति करते हैं।

“शरण पड़े भक्तों के, भंडार सदा भरे”
हे धनपति! जो भक्त श्रद्धा से आपकी शरण में आते हैं, उनके जीवन में आवश्यक संसाधनों और समृद्धि की कमी न हो।

“रत्नों से भरे भंडार, धन-धान्य अपार”
यह पंक्ति कुबेर जी की अपार संपदा और धन के अधिपति स्वरूप को दर्शाती है।

“जो जन तेरी सेवा करे, होय सदा सुखकार”
जो व्यक्ति श्रद्धा, सदाचार और सेवा-भाव से भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन में सुख और संतोष की भावना बढ़े।

“अलकापुरी के स्वामी, धनपति कहलाए”
भगवान कुबेर को अलकापुरी का स्वामी और धन-संपदा का अधिपति माना गया है।

“शिव के प्रिय सेवक हो, धर्म मार्ग दिखलाओ”
कुबेर भगवान शिव के भक्त माने जाते हैं। भक्त उनसे प्रार्थना करता है कि उसका जीवन धर्म और सदाचार के मार्ग पर चले।

“निर्धनता का नाश करो, संकट दूर भगाओ”
भक्त आर्थिक कठिनाइयों और जीवन के संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करता है।

“धन-धान्य और सुख-समृद्धि, घर-आँगन में आए”
अंत में भक्त अपने परिवार के लिए सुख, शांति, स्थिरता और समृद्धि की कामना करता है।


📜 भगवान कुबेर की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान कुबेर ऋषि विश्रवा के पुत्र थे। वे तपस्वी और धर्मपरायण स्वभाव के माने जाते हैं। अपनी तपस्या और साधना से उन्होंने देवताओं की कृपा प्राप्त की। कथा के अनुसार कुबेर को धन और संपदा का अधिपति होने का सम्मान प्राप्त हुआ तथा उन्हें देवताओं के कोषाध्यक्ष का पद मिला। उनके लिए अलकापुरी नामक दिव्य नगरी का वर्णन मिलता है।

कुबेर के पास दिव्य पुष्पक विमान भी था। बाद में उनके सौतेले भाई रावण ने बलपूर्वक कुबेर से लंका और पुष्पक विमान छीन लिया। रामायण की प्रसिद्ध कथा में आगे चलकर पुष्पक विमान भगवान श्रीराम के उपयोग में आया। भगवान कुबेर का भगवान शिव से भी विशेष संबंध बताया जाता है। कैलास और शिवभक्ति से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाओं में कुबेर का उल्लेख मिलता है।

इस प्रकार कुबेर का चरित्र केवल धन के स्वामी के रूप में नहीं, बल्कि तप, धर्म, दान और ईश्वर-भक्ति से जुड़े देवता के रूप में भी देखा जाता है।


🪔 भगवान कुबेर की पूजा विधि

  1. पूजा स्थान को स्वच्छ करके पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. भगवान कुबेर की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
  3. दीपक और धूप जलाएँ।
  4. भगवान कुबेर को पुष्प, अक्षत, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
  5. श्रद्धापूर्वक कुबेर मंत्र का जाप करें।
  6. भगवान कुबेर की आरती करें।
  7. परिवार की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना करें।
  8. अंत में प्रसाद वितरित करें।

विशेष भाव: पूजा के साथ ईमानदार परिश्रम, उचित कमाई, दान और धन के सदुपयोग का संकल्प करना भी शुभ माना जाता है।


🌺 भगवान कुबेर की पूजा सामग्री

  • भगवान कुबेर का चित्र या प्रतिमा
  • दीपक और घी/तेल
  • धूप या अगरबत्ती
  • पुष्प एवं माला
  • अक्षत
  • रोली या कुमकुम
  • चंदन
  • फल
  • मिठाई या नैवेद्य
  • जल से भरा कलश
  • सुपारी
  • पान
  • सिक्के या धन का प्रतीक
  • पूजा की थाली

🕉️ भगवान कुबेर का मंत्र

सरल कुबेर मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यपदये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

कुबेर गायत्री मंत्र

ॐ यक्षराजाय विद्महे,
वैश्रवणाय धीमहि।
तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्॥

सामान्य मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये नमः॥

धन प्राप्ति महामंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥

अष्टलक्ष्मी कुबेर मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय नमः॥

मंत्र जाप के नियम

  • दिशा: जाप करते समय आपका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

  • समय: सुबह स्नान के बाद या शांत मन से संध्या के समय जाप करें।

  • माला: रुद्राक्ष या कमल गट्टे की माला का उपयोग करना शुभ माना जाता है।


🌟 भगवान कुबेर की आरती का महत्व

धार्मिक मान्यताओं में भगवान कुबेर की पूजा को धन-संपदा और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। आरती के माध्यम से भक्त भगवान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है और अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता, सद्बुद्धि तथा संतोष की प्रार्थना करता है।

कुबेर आराधना का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश यह भी है कि धन का अर्जन धर्मसम्मत तरीके से हो और उसका उपयोग परिवार, समाज, सेवा तथा शुभ कार्यों में किया जाए।


🙏 भगवान कुबेर की आरती करने के लाभ

धार्मिक विश्वास के अनुसार भगवान कुबेर की श्रद्धापूर्वक पूजा और आरती से:

  • घर में सुख-समृद्धि की भावना बढ़ती है।
  • आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • धन के सदुपयोग और दान की प्रेरणा मिलती है।
  • मन में सकारात्मकता और संतोष का भाव आता है।
  • व्यापार एवं कार्य में सफलता के लिए भगवान का आशीर्वाद मांगा जाता है।
  • परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • व्यक्ति को परिश्रम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

ध्यान दें: ये धार्मिक मान्यताएँ हैं; इन्हें निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं समझना चाहिए।


🕰️ भगवान कुबेर की पूजा का सही समय

भगवान कुबेर की पूजा के लिए प्रातःकाल या संध्याकाल उपयुक्त माना जाता है। विशेष अवसरों पर कुबेर जी की पूजा की जाती है, जैसे:

  • धनतेरस
  • दीपावली
  • अक्षय तृतीया
  • शुक्रवार के दिन लक्ष्मी-कुबेर पूजन
  • किसी नए व्यवसाय या आर्थिक कार्य की शुरुआत

विशेष पर्वों पर पूजा का समय स्थानीय पंचांग और उस दिन के शुभ मुहूर्त के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है।


💫 प्रेरणादायक संदेश

धन जीवन का साधन है, जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं।
भगवान कुबेर की आराधना हमें यह प्रेरणा देती है कि धन ईमानदार परिश्रम से अर्जित किया जाए, उसका उचित उपयोग किया जाए और जरूरतमंदों की सहायता में भी लगाया जाए। सच्ची समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि संतोष, सद्बुद्धि, परिवार का सुख, स्वस्थ संबंध और सेवा-भाव में भी होती है।


❓ भगवान कुबेर की आरती — FAQ

1. भगवान कुबेर कौन हैं?

भगवान कुबेर हिंदू धर्म में धन-संपदा के देवता, यक्षराज और देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में पूजित हैं।

2. भगवान कुबेर की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार कुबेर जी की पूजा धन, समृद्धि, आर्थिक स्थिरता और सुख-शांति की कामना से की जाती है।

3. भगवान कुबेर का वाहन क्या है?

कई परंपराओं और चित्रणों में कुबेर जी के वाहन के रूप में नेवला का उल्लेख मिलता है।

4. भगवान कुबेर की पूजा कब करनी चाहिए?

प्रातःकाल या संध्याकाल पूजा की जा सकती है। धनतेरस और दीपावली जैसे अवसरों पर भी कुबेर पूजन की परंपरा है।

5. भगवान कुबेर का प्रमुख मंत्र कौन-सा है?

“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यपदये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥” का जाप कुबेर उपासना में किया जाता है।

6. क्या कुबेर जी की पूजा लक्ष्मी जी के साथ की जाती है?

हाँ, अनेक गृहस्थ परंपराओं में माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर का संयुक्त पूजन किया जाता है।

7. कुबेर जी को कौन-सी सामग्री अर्पित की जाती है?

पुष्प, अक्षत, चंदन, दीप, धूप, फल, मिठाई और अन्य सामान्य पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है।

8. क्या भगवान कुबेर की आरती रोज कर सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा के अनुसार नियमित रूप से भगवान कुबेर का स्मरण, मंत्र-जाप और आरती की जा सकती है।

9. कुबेर जी की पूजा का मुख्य संदेश क्या है?

कुबेर उपासना धन के साथ सदाचार, संतोष, दान और धन के उचित उपयोग का संदेश देती है।

10. क्या केवल पूजा करने से धन की प्राप्ति निश्चित है?

धार्मिक मान्यताओं में पूजा को शुभ और मंगलकारी माना जाता है, लेकिन आर्थिक सफलता के लिए ज्ञान, परिश्रम, उचित योजना और जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार भी आवश्यक हैं।


📢 भगवान कुबेर जी का जयघोष

जय धनपति कुबेर महाराज की! 🙏
जय यक्षराज कुबेर की! 🙏
जय अलकापुरी नरेश कुबेर की! 🙏
भगवान कुबेर महाराज की जय! 🙏
श्री लक्ष्मी-कुबेर भगवान की जय! 🙏🕉️🌺

🙏 श्री कुबेर महाराज की जय! 🙏

श्री कुबेर अष्टोत्तर शतनामावली – 108 नाम | आरती माँ लक्ष्मीजी | आरती श्री गणेश जी | आरती ॐ जय जगदीश हरे | श्री कुबेर चालीसा

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*