Shri Ramchandra Ji Ki Aarti – 2

Shri Ramchandra Ji Ki Aarti - 2
Shri Ramchandra Ji Ki Aarti - 2

श्री रामचन्द्र जी की आरती – 2 (Shri Ramchandra Ji Ki Aarti – 2)

“आरती कीजै रामचन्द्र जी की” भगवान श्रीराम की स्तुति और आराधना में गाई जाने वाली भक्तिपूर्ण आरती है। इसमें श्रीराम को सीतापति, दुष्टों का संहार करने वाले, भक्तों के उद्धारकर्ता और त्रिभुवन के स्वामी के रूप में प्रणाम किया गया है।

आरती की विशेषता यह है कि इसमें पाँच आरतियों के माध्यम से भगवान के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और लीलाओं का स्मरण किया गया है। पाठ में श्रीराम के साथ भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भी उल्लेख आता है, जिससे भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की एकता का भाव प्रकट होता है।

॥ आरती ॥

आरती कीजै रामचन्द्र जी की।
हरि-हरि दुष्टदलन सीतापति जी की॥

पहली आरती पुष्पन की माला।
काली नाग नाथ लाये गोपाला॥

दूसरी आरती देवकी नन्दन।
भक्त उबारन कंस निकन्दन॥

तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे।
रत्‍‌न सिंहासन सीता रामजी सोहे॥

चौथी आरती चहुं युग पूजा।
देव निरंजन स्वामी और न दूजा॥

पांचवीं आरती राम को भावे।
रामजी का यश नामदेव जी गावें॥

आरती कीजै रामचन्द्र जी की।
हरि-हरि दुष्टदलन सीतापति जी की॥

 

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🌸 हिंदी भावार्थ

**“आरती कीजै रामचन्द्र जी की, हरि-हरि दुष्टदलन सीतापति जी की॥”**

हे सीताजी के पति श्रीराम! आपकी आरती की जाती है। आप हरि स्वरूप हैं और अधर्म तथा दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले हैं।

**पहली आरती पुष्पन की माला। काली नाग नाथ लाये गोपाला॥**

पहली आरती भगवान को पुष्पों की सुंदर माला अर्पित करके की जाती है। यहाँ भगवान की उस लीला का स्मरण है जिसमें श्रीकृष्ण ने कालिय नाग का दमन किया।

**दूसरी आरती देवकी नन्दन। भक्त उबारन कंस निकन्दन॥**

दूसरी आरती देवकीनंदन भगवान श्रीकृष्ण की है, जिन्होंने कंस का वध करके धर्म की स्थापना की और अपने भक्तों को संकट से उबारा।

**तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे। रत्न सिंहासन सीता रामजी सोहे॥**

तीसरी आरती उस प्रभु की है जिनका दिव्य स्वरूप तीनों लोकों को मोहित करता है। रत्नों से सुसज्जित सिंहासन पर विराजमान श्रीसीताराम अत्यंत सुंदर दिखाई देते हैं।

**चौथी आरती चहुं युग पूजा। देव निरंजन स्वामी और न दूजा॥**

चौथी आरती उस निराकार, निर्मल और परम प्रभु की है जिनकी पूजा चारों युगों में होती आई है। उनके समान दूसरा कोई नहीं है।

**पांचवीं आरती राम को भावे। रामजी का यश नामदेव जी गावें॥**

पाँचवीं आरती श्रीराम को अत्यंत प्रिय है और इसमें भगवान के यश एवं महिमा का गान किया जाता है। इस पंक्ति में नामदेव जी का उल्लेख मिलता है।


📖 पौराणिक कथा

इस आरती का भाव मुख्य रूप से भगवान के धर्म-संरक्षक और भक्तवत्सल स्वरूप की ओर केंद्रित है।

श्रीराम के जीवन में धर्म, सत्य और मर्यादा सर्वोपरि रहे। भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में श्रीराम के रूप में अवतार लेकर अधर्म का विनाश और धर्म की स्थापना की। श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए वनवास स्वीकार किया, सीता माता के हरण के बाद रावण के विरुद्ध धर्मयुद्ध किया और अंततः लंका पर विजय प्राप्त की।

आरती की पंक्ति “हरि-हरि दुष्टदलन सीतापति जी की” इसी धर्म-संस्थापनकारी स्वरूप को प्रणाम करती है।

साथ ही, इस आरती के कुछ पद भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध लीलाओं का स्मरण कराते हैं। कालिय नाग का दमन, देवकीनंदन और कंस-वध श्रीकृष्णावतार से संबंधित हैं। इसलिए आरती में भगवान के विष्णु-तत्त्व और विभिन्न अवतारों की एकता का सुंदर भक्तिभाव दिखाई देता है।


🪔 पूजा विधि

श्रीराम की इस आरती को सरल विधि से घर पर किया जा सकता है:

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को साफ करके श्रीराम-सीता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. दीपक प्रज्वलित करें।
  4. भगवान को चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  5. श्रीराम नाम या श्रीराम मंत्र का जाप करें।
  6. संभव हो तो तुलसीदल और पुष्प अर्पित करें।
  7. भोग लगाएँ।
  8. श्रद्धापूर्वक “आरती कीजै रामचन्द्र जी की” गाएँ।
  9. अंत में भगवान को प्रणाम करके परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

🌺 पूजा सामग्री

  • श्रीराम-सीता का चित्र या प्रतिमा
  • दीपक एवं घी/तेल
  • रुई की बत्ती
  • धूप/अगरबत्ती
  • चंदन
  • अक्षत
  • पुष्प एवं पुष्पमाला
  • तुलसीदल
  • नैवेद्य/मिठाई
  • फल
  • जल से भरा कलश या पात्र
  • कपूर
  • आरती की थाली
  • घंटी

नोट: पूजा में सामग्री से अधिक महत्व श्रद्धा और भक्ति का माना जाता है।


🙏 श्रीराम मंत्र

पूजा और आरती से पहले या बाद में इनमें से किसी सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है:

॥ श्री रामाय नमः ॥

या

॥ ॐ श्री रामाय नमः ॥

भक्ति परंपरा में सरल “श्री राम” नाम का जाप भी अत्यंत प्रिय माना जाता है।


आरती का महत्व

“आरती कीजै रामचन्द्र जी की” का महत्व केवल दीप दिखाने तक सीमित नहीं है। आरती के माध्यम से भक्त भगवान के प्रति कृतज्ञता, समर्पण और प्रेम व्यक्त करता है।

इस आरती में श्रीराम के कई दिव्य गुणों का स्मरण होता है—धर्म की रक्षा, अधर्म का विनाश, भक्तों की रक्षा और संसार के कल्याण की भावना

आरती के समय दीपक की ज्योति को भगवान के समक्ष घुमाना इस भाव का प्रतीक माना जाता है कि हमारा जीवन भी ज्ञान, सत्य और धर्म के प्रकाश से प्रकाशित हो।


🌼 आरती के लाभ

श्रद्धा और नियमित भक्ति के साथ आरती करने से भक्त को आध्यात्मिक रूप से कई सकारात्मक अनुभव प्राप्त हो सकते हैं:

  • मन को शांति और एकाग्रता मिलती है।
  • भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति और श्रद्धा बढ़ती है।
  • परिवार में सकारात्मक और भक्तिमय वातावरण बनता है।
  • नकारात्मक विचारों से मन को दूर रखने में सहायता मिलती है।
  • धैर्य, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
  • संकट के समय ईश्वर पर विश्वास मजबूत होता है।
  • बच्चों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्कार विकसित करने में सहायता मिलती है।

ध्यान दें: ये धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं; इन्हें चिकित्सकीय या वैज्ञानिक उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।


⏰ पूजा का सही समय

श्रीराम की आरती के लिए सामान्यतः ये समय शुभ माने जाते हैं:

🌅 प्रातःकाल: स्नान और पूजा के बाद
🌇 संध्याकाल: सूर्यास्त के आसपास
🪔 विशेष अवसर: राम नवमी, राम विवाह, दीपावली तथा अन्य श्रीराम से जुड़े धार्मिक अवसर

घर की नियमित पूजा में प्रातः या संध्याकाल आरती करना सुविधाजनक और भक्तिपूर्ण माना जाता है।


💛 प्रेरणादायक संदेश

“श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य, धर्म और मर्यादा का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जिस हृदय में राम का नाम बसता है, वहाँ आशा, साहस और विश्वास का दीप सदैव जलता रहता है।”

🌿 एक छोटा संदेश

“राम नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि विश्वास, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।”


❓ FAQ

1. आरती कीजै रामचन्द्र जी की आरती किस भगवान की है?

यह मुख्य रूप से भगवान श्रीराम की आराधना में गाई जाने वाली आरती है।

2. इस आरती में कृष्ण जी का उल्लेख क्यों आता है?

इस पाठ की कुछ परंपरागत पंक्तियों में कालिय नाग, देवकीनंदन और कंस-वध जैसे श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंग हैं। इससे भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों के प्रति एकात्म भक्ति का भाव दिखाई देता है।

3. श्रीराम की आरती कब करनी चाहिए?

प्रातःकाल या संध्याकाल आरती करना सामान्य रूप से शुभ माना जाता है।

4. क्या आरती के लिए विशेष सामग्री आवश्यक है?

नहीं। दीपक, कपूर, पुष्प और श्रद्धा से भी आरती की जा सकती है।

5. श्रीराम का कौन-सा मंत्र आरती के साथ बोल सकते हैं?

“ॐ श्री रामाय नमः” या सरल रूप में “श्री राम” का जाप किया जा सकता है।

6. क्या आरती प्रतिदिन की जा सकती है?

हाँ, श्रद्धा के साथ इसे दैनिक पूजा में शामिल किया जा सकता है।

7. श्रीराम की आरती करने का मुख्य भाव क्या होना चाहिए?

मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, कृतज्ञता और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प होना चाहिए।

8. क्या राम नवमी पर यह आरती गाई जा सकती है?

हाँ, राम नवमी पर श्रीराम जन्मोत्सव और पूजा के अवसर पर आरती की जा सकती है।

9. क्या आरती परिवार के साथ गाई जा सकती है?

हाँ। सामूहिक आरती परिवार में भक्तिमय वातावरण और धार्मिक संस्कार विकसित करने का सुंदर माध्यम है।

10. क्या इस आरती के पाठ में अलग-अलग संस्करण मिलते हैं?

हाँ। लोक एवं क्षेत्रीय परंपराओं में शब्दों और पदों में कुछ अंतर मिल सकता है।


🚩॥ जयघोष ॥

॥ जय श्री राम ॥
॥ सियावर रामचंद्र की जय ॥
॥ श्री रामलला सरकार की जय ॥
॥ कौसल्या नंदन श्री रामचंद्र की जय ॥
॥ रघुकुल तिलक श्री रामचंद्र की जय ॥
॥ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जय ॥
॥ माता सीता जी की जय ॥
॥ लक्ष्मण जी की जय ॥
॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥🙏🙏

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