Shri Ram Lala Ki Aarti

Shri Ram Lala Ki Aarti
श्री राम लला की आरती

श्री राम लला की आरती (Shri Ram Lala Ki Aarti)

भगवान श्री राम सनातन धर्म में भगवान विष्णु के सातवें अवतार और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजनीय हैं। वे सत्य, धर्म, करुणा, त्याग, आदर्श और मर्यादा के प्रतीक माने जाते हैं। “आरती कीजे श्रीरामलला की” भगवान श्री राम के इसी दिव्य स्वरूप, उनके गुणों और रामकथा की प्रमुख लीलाओं का स्मरण कराने वाली लोकप्रिय आरती है।

॥ आरती ॥

आरती कीजे श्रीरामलला की।
पूण निपुण धनुवेद कला की॥

धनुष वान कर सोहत नीके।
शोभा कोटि मदन मद फीके॥

सुभग सिंहासन आप बिराजैं।
वाम भाग वैदेही राजैं॥

कर जोरे रिपुहन हनुमाना।
भरत लखन सेवत बिधि नाना॥

शिव अज नारद गुन गन गावैं।
निगम नेति कह पार न पावैं॥

नाम प्रभाव सकल जग जानैं।
शेष महेश गनेस बखानैं॥

भगत कामतरु पूरणकामा।
दया क्षमा करुना गुन धामा॥

सुग्रीवहुँ को कपिपति कीन्हा।
राज विभीषन को प्रभु दीन्हा॥

खेल खेल महु सिंधु बधाये।
लोक सकल अनुपम यश छाये॥

दुर्गम गढ़ लंका पति मारे।
सुर नर मुनि सबके भय टारे॥

देवन थापि सुजस विस्तारे।
कोटिक दीन मलीन उधारे॥

कपि केवट खग निसचर केरे।
करि करुना दुःख दोष निवेरे॥

देत सदा दासन्ह को माना।
जगतपूज भे कपि हनुमाना॥

आरत दीन सदा सत्कारे।
तिहुपुर होत राम जयकारे॥

कौसल्यादि सकल महतारी।
दशरथ आदि भगत प्रभु झारी॥

सुर नर मुनि प्रभु गुन गन गाई।
आरति करत बहुत सुख पाई॥

धूप दीप चंदन नैवेदा।
मन दृढ़ करि नहिं कवनव भेदा॥

राम लला की आरती गावै।
राम कृपा अभिमत फल पावै॥

आरती कीजे श्रीरामलला की।
पूण निपुण धनुवेद कला की॥

 

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🌺 हिंदी भावार्थ

आरती कीजे श्रीरामलला की

हे भक्तों! भगवान श्री रामलला की आरती कीजिए, जो धनुर्विद्या में निपुण और सभी कलाओं से संपन्न हैं।

धनुष वान कर सोहत नीके

भगवान राम के हाथों में धनुष-बाण अत्यंत सुंदर लगते हैं। उनका दिव्य रूप करोड़ों कामदेवों के सौंदर्य को भी फीका कर देता है।

सुभग सिंहासन आप बिराजैं

भगवान श्री राम सुंदर सिंहासन पर विराजमान हैं और उनके वाम भाग में माता सीता विराजती हैं।

कर जोरे रिपुहन हनुमाना

भक्त हनुमान हाथ जोड़कर प्रभु की सेवा में उपस्थित हैं। भरत और लक्ष्मण भी विभिन्न प्रकार से प्रभु की सेवा करते हैं।

शिव अज नारद गुन गन गावैं

भगवान शिव, ब्रह्मा और देवर्षि नारद भी भगवान राम के गुणों का गान करते हैं। वेद भी उनके स्वरूप का पूर्ण वर्णन नहीं कर पाते।

नाम प्रभाव सकल जग जानैं

भगवान श्री राम के नाम की महिमा को संसार जानता है। शेषनाग, भगवान शिव और गणेश जी भी उनके नाम का गुणगान करते हैं।

भगत कामतरु पूरणकामा

भगवान राम भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करने वाले कल्पवृक्ष के समान हैं। वे दया, क्षमा और करुणा के भंडार हैं।

सुग्रीवहुँ को कपिपति कीन्हा

भगवान राम ने सुग्रीव को वानरों का राजा बनाया और विभीषण को लंका का राजा बनाया।

खेल खेल महु सिंधु बधाये

भगवान राम ने समुद्र पर सेतु का निर्माण कराया और उनकी कीर्ति तीनों लोकों में फैल गई।

दुर्गम गढ़ लंका पति मारे

भगवान राम ने रावण का वध करके देवताओं, मनुष्यों और ऋषियों के भय को दूर किया।

कपि केवट खग निसचर केरे

भगवान राम ने अपने भक्तों, वानरों, केवट और अन्य शरणागतों पर करुणा की और उनके दुःख-दोष दूर किए।

जगतपूज भे कपि हनुमाना

भगवान राम की कृपा से भक्त हनुमान संसारभर में पूजनीय हुए।

राम कृपा अभिमत फल पावै

जो भक्त श्रद्धा और प्रेम से भगवान राम की आरती गाता है, उसे भगवान की कृपा और अपने मनोवांछित फल की प्राप्ति की कामना की जाती है।


📖 श्री राम जी की पौराणिक कथा

पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में हुआ। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं।

राजा दशरथ ने श्री राम को अयोध्या का राजा बनाने का निर्णय लिया, लेकिन कैकेयी के वरदानों के कारण श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना पड़ा। पिता के वचन की रक्षा के लिए श्री राम ने बिना किसी विरोध के वनवास स्वीकार किया।

माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वन गए। वनवास के दौरान रावण ने माता सीता का हरण किया। श्री राम ने सुग्रीव और वानर सेना की सहायता ली। भक्त हनुमान ने माता सीता का पता लगाया और श्री राम का संदेश उन्हें दिया।

वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बनाया और श्री राम की सेना लंका पहुँची। युद्ध में श्री राम ने रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया।

चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके श्री राम अयोध्या लौटे। उनके लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। श्री राम का राज्य “रामराज्य” के आदर्श के रूप में प्रसिद्ध हुआ।


🪔 श्री राम जी की पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
  3. भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  4. दीपक और धूप जलाएं।
  5. भगवान को जल, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  6. भगवान श्री राम को पीले या लाल पुष्प अर्पित करें।
  7. नैवेद्य या सात्त्विक भोग लगाएं।
  8. “श्री राम जय राम जय जय राम” या “ॐ श्री रामाय नमः” का जाप करें।
  9. श्रद्धापूर्वक “आरती कीजे श्रीरामलला की” गाएं।
  10. आरती के बाद भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी को प्रणाम करें।
  11. परिवार के सुख-शांति और मंगल के लिए प्रार्थना करें।

🌿 श्री राम जी की पूजा सामग्री

  • श्री राम जी की प्रतिमा या चित्र
  • माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का चित्र
  • स्वच्छ पीला या लाल वस्त्र
  • चंदन
  • अक्षत
  • पुष्प
  • तुलसी दल
  • धूप
  • दीपक
  • कपूर
  • रोली
  • मौली
  • जल या गंगाजल
  • फल
  • मिठाई
  • नैवेद्य
  • पंचामृत

नोट: पूजा में सभी सामग्री अनिवार्य नहीं हैं। श्रद्धा और उपलब्धता के अनुसार पूजा की जा सकती है।


🕉️ श्री राम जी के प्रमुख मंत्र

श्री राम मंत्र

॥ ॐ श्री रामाय नमः ॥

राम नाम मंत्र

॥ श्री राम जय राम जय जय राम ॥

राम तारक मंत्र

॥ राम ॥

श्री राम ध्यान मंत्र

॥ श्री रामचन्द्राय नमः ॥

नोट: भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किसी एक मंत्र का नियमित जाप कर सकते हैं।


🪔 श्री राम जी की आरती का महत्व

भगवान श्री राम की आरती उनके दिव्य स्वरूप और आदर्श जीवन का स्मरण करने का माध्यम है। “आरती कीजे श्रीरामलला की” में भगवान राम के धनुर्विद्या-कौशल, माता सीता के साथ उनके स्वरूप, हनुमान जी की भक्ति, सुग्रीव और विभीषण पर उनकी कृपा तथा रावण-वध जैसी प्रमुख घटनाओं का स्मरण मिलता है।

आरती करते समय दीपक की ज्योति भगवान को अर्पित करना जीवन में धर्म, सत्य और ज्ञान का प्रकाश बनाए रखने की भक्तिपूर्ण भावना का प्रतीक माना जाता है।


🌸 श्री राम जी की आरती के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री राम की आरती करने से:

  • मन में शांति और सकारात्मकता की भावना बढ़ती है।
  • भगवान श्री राम के प्रति श्रद्धा और भक्ति मजबूत होती है।
  • सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने की प्रेरणा मिलती है।
  • मन को एकाग्र करने में सहायता मिलती है।
  • परिवार के सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना की जाती है।
  • राम नाम के प्रति आस्था और आध्यात्मिक भावना बढ़ती है।
  • भगवान श्री राम के आदर्श जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर मिलता है।

नोट: ये धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं; इन्हें वैज्ञानिक या चिकित्सकीय गारंटी के रूप में नहीं लेना चाहिए।


⏰ श्री राम जी की पूजा का सही समय

भगवान श्री राम की पूजा किसी भी समय श्रद्धापूर्वक की जा सकती है।

🌅 प्रातःकाल

सुबह स्नान के बाद श्री राम का स्मरण और पूजा करना शुभ माना जाता है।

🌆 संध्या काल

शाम को दीपक जलाकर श्री राम जी की आरती की जा सकती है।

🌸 राम नवमी

राम नवमी भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का प्रमुख पर्व है। इस अवसर पर विशेष पूजा, मंत्र जाप और आरती की जाती है।

🪔 दीपावली

दीपावली के अवसर पर भगवान श्री राम के अयोध्या लौटने की स्मृति में दीप जलाने और पूजा करने की परंपरा है।


💫 प्रेरणादायक संदेश

“धर्म का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन वही जीवन को सच्ची दिशा देता है।”

भगवान श्री राम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन हों, व्यक्ति को सत्य, धर्म, कर्तव्य और मर्यादा का त्याग नहीं करना चाहिए।

“श्री राम हमें सिखाते हैं कि शक्ति के साथ विनम्रता, विजय के साथ करुणा और जीवन में हर परिस्थिति के बीच धर्म का साथ बनाए रखना ही सच्ची महानता है।” 

“जहाँ सत्य है, वहाँ राम हैं।
जहाँ मर्यादा है, वहाँ राम हैं।
जहाँ करुणा है, वहाँ राम हैं।
और जहाँ राम का नाम है, वहाँ आशा कभी समाप्त नहीं होती।”


❓ FAQ

1. “आरती कीजे श्रीरामलला की” किसकी आरती है?

यह भगवान श्री रामलला को समर्पित प्रसिद्ध आरती है, जिसमें श्री राम के दिव्य स्वरूप और उनकी प्रमुख लीलाओं का वर्णन मिलता है।

2. श्री राम जी की सबसे प्रसिद्ध आरती कौन-सी है?

“आरती कीजे श्रीरामलला की” भगवान श्री राम की लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इसके अतिरिक्त “श्री रामचंद्र कृपालु भज मन” का भी पूजा और आरती के समय व्यापक रूप से पाठ किया जाता है।

3. श्री राम जी का प्रमुख मंत्र कौन-सा है?

“श्री राम जय राम जय जय राम” और “ॐ श्री रामाय नमः” भगवान श्री राम के प्रचलित मंत्र हैं।

4. भगवान श्री राम का जन्म कहाँ हुआ था?

पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ था।

5. श्री राम के माता-पिता कौन थे?

राजा दशरथ और माता कौशल्या भगवान श्री राम के माता-पिता माने जाते हैं।

6. भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहा जाता है?

उन्होंने अपने जीवन में सत्य, धर्म, कर्तव्य, वचनपालन और आदर्श आचरण का पालन किया। इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।

7. श्री राम की पूजा कब करनी चाहिए?

सुबह या शाम भगवान श्री राम की पूजा की जा सकती है। राम नवमी पर विशेष पूजा का महत्व माना जाता है।

8. श्री राम की पूजा में क्या भोग लगाएं?

फल, मिठाई, पंचामृत और अन्य सात्त्विक भोजन का भोग लगाया जा सकता है। तुलसी दल अर्पित करने की भी परंपरा है।

9. क्या घर में श्री राम जी की आरती कर सकते हैं?

हाँ। घर में भगवान श्री राम की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती की जा सकती है।

10. आरती के बाद कौन-सा जयघोष करें?

आरती के बाद “जय श्री राम”, “सियावर रामचंद्र की जय” और “पवनसुत हनुमान की जय” जैसे जयघोष किए जा सकते हैं।


🚩॥ जयघोष ॥

॥ जय श्री राम ॥
॥ सियावर रामचंद्र की जय ॥
॥ श्री रामलला सरकार की जय ॥
॥ रघुकुल तिलक श्री रामचंद्र जी की जय ॥
॥ माता सीता जी की जय ॥
॥ लक्ष्मण जी की जय ॥
॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥
॥ अयोध्यापति श्री रामचंद्र जी की जय ॥🙏🙏

 

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